RSOS में बिना सूचना सैकड़ों सप्लीमेंट्री आवेदन निरस्त
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एडमिट कार्ड के लिए पहुंचने पर पता चल रहा है कि फॉर्म रिजेक्ट हो गया है
विद्यार्थी असमंजस में, शिक्षक भी सकते में
अब तक निरस्तीकरण से पहले केन्द्रों पर पूर्व सूचना जाती थी
आवेदन सुधारने का मौका इस बार मिल ही नहीं सका
उदयपुर, 3 दिसम्बर: राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (RSOS) बोर्ड में 10वीं और 12वीं के सप्लीमेंट्री परीक्षार्थियों के आवेदन इस बार बिना किसी पूर्व सूचना के निरस्त कर दिए गए, जिससे सैकड़ों विद्यार्थियों में रोष है। हैरानी की बात यह रही कि न तो विद्यार्थियों को रिजेक्शन से पहले कोई संदेश मिला, न ही स्कूल में इसकी सूचना आई है। यह तो तब पता चल रहा है जब बच्चे एडमिट कार्ड के लिए पहुंच रहे हैं और लॉगिन करने पर उनके आवेदन को नोट अप्रूवल बताया जा रहा है, जबकि परीक्षा 4 दिसम्बर से ही है।
शिक्षकों का कहना है कि इस बार ओपन बोर्ड की प्रक्रिया में स्कूल सेंटरों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। जबकि, अब से पहले यह व्यवस्था थी कि त्रुटि सूची स्कूलों को पहले उपलब्ध कराई जाती थी, ताकि शिक्षक विद्यार्थियों से सम्पर्क कर आवश्यक सुधार करवा सकें।
इसी तरह, स्ट्रीम-2 योजना में भी सीधे रिजेक्शन की फाइल स्कूल में आई है। स्ट्रीम-2 वह व्यवस्था है जिसमें रेगुलर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में फेल विद्यार्थी ओपन बोर्ड का चयन कर अनुत्तीर्ण वाले विषयों की परीक्षा दे सकते हैं। पूर्व में यह प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए सरल और सहायक रहती थी, पर इस बार अचानक हुए बदलाव ने विद्यार्थियों को असमंजस में डाल दिया है। शिक्षकों का कहना है कि अधिकतर बच्चे ऐसे हैं जिनके परिवार में केवल पिता के पास फोन है और एसएमएस जैसी चीजों से उन्हें सरोकार ही नहीं होता। वे तो आते-जाते स्कूल में पता करते रहते हैं।
सत्र बर्बाद, फीस का असमंज
-इस स्थिति ने दो बड़ी समस्याएं खड़ी कर दी हैं। पहली, सैकड़ों विद्यार्थियों का एक पूरा सत्र बर्बाद हो गया है। दूसरी, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अगली बार परीक्षा आवेदन में नई फीस देनी होगी या पूर्व में जमा की गई फीस समायोजित की जाएगी। बोर्ड की ओर से इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुआ है।
ओपन बोर्ड की भावना ही आहत
-RSOS संभालने वाले समन्वयक शिक्षकों का कहना है कि ओपन बोर्ड का उद्देश्य ही उन विद्यार्थियों की सहायता करना है जो आर्थिक और पारिवारिक सीमाओं के कारण नियमित शिक्षा नहीं ले पाते। ऐसे बच्चे नौकरी करते हुए पढ़ाई पूरी करते हैं। आवेदनों का इस प्रकार निरस्त हो जाना न केवल उनकी मेहनत पर पानी फेरता है, बल्कि उनका मनोबल भी तोड़ देता है। कई अभिभावक स्मार्टफोन व डिजिटल सूचनाओं से परिचित नहीं हैं, ऐसे में केवल एसएमएस आधारित प्रणाली पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
पूर्व सूचना की कड़ी फिर से जुड़े
शिक्षकों और अभिभावकों की मांग है कि पूर्व की तरह त्रुटि सूची स्कूल सेंटरों को भेजी जाए ताकि आवेदन सुधार कर विद्यार्थियों को मौका मिल सके। वर्ना, यह व्यवस्था ओपन बोर्ड की मूल भावना को ही प्रभावित करेगी और पढ़ाई जारी रखने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को हतोत्साहित करेगी।
बोले जिला शिक्षा अधिकारी
जिला शिक्षा अधिकारी लोकेश भारती ने इस संबंध में कहा कि इतनी संख्या में रिजेक्शन की जानकारी उन तक नहीं आई है। वे तुरंत ही पूरी जांच करवाकर आगे रिपोर्ट भेजेंगे और छात्रहित में निर्णय का प्रयास करेंगे।
