LOADING

Type to search

कोटड़ा में ढोल बजाकर किया बांध का विरोध

Local

कोटड़ा में ढोल बजाकर किया बांध का विरोध

Share

चक सांडमारिया और बूझा का नाका बांध के खिलाफ आदिवासी समाज ने उठाई आवाज
उदयपुर, 4 दिसम्बर :
जिले के कोटड़ा क्षेत्र में गुरुवार को जवाई पुनर्भरण योजना से जुड़े प्रस्तावित चक सांडमारिया बांध और बूझा का नाका बांध परियोजनाओं के खिलाफ आदिवासी समाज ने विरोध दर्ज कराया। आदिवासी समाज संघर्ष समिति—माण्डवा खण्ड (कोटड़ा) के आह्वान पर सैकड़ों ग्रामीण कोटड़ा कस्बे में एकत्र हुए और ढोल बजाकर अपना रोष व्यक्त किया। आदिवासी महिलाओं और पुरुषों की बड़ी संख्या इस जनआंदोलन में शामिल हुई, जिनकी एक ही आवाज थी—“हमें बांध नहीं चाहिए, हमारी जमीन और हमारा वजूद बचाओ।”
विरोध सभा के बाद प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल के नाम तहसीलदार लालाराम मीणा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि प्रस्तावित दोनों बांधों के निर्माण से सैकड़ों आदिवासी किसानों की कृषि भूमि डूब क्षेत्र में आ जाएगी, जिससे उनका जीवन, आर्थिक स्थिति और आजीविका गंभीर रूप से प्रभावित होगी। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीनें और बसेरे डूब में चले जाएंगे, जबकि पुनर्वास एवं मुआवजा को लेकर किसी भी प्रकार का ठोस आश्वासन सरकार की ओर से नहीं दिया गया है।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा माही डैम से जवाई बांध को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित परियोजना पर कार्य प्रारंभ होना एक स्वागतयोग्य कदम है, परंतु इसके बाद भी मारवाड़ क्षेत्र की जलापूर्ति समस्या पूरी तरह नहीं सुलझ पाएगी। ऐसे में कोटड़ा क्षेत्र में नए बांध निर्माण की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी इसी तरह की परियोजनाओं ने कई आदिवासी परिवारों को विस्थापित किया है और अब यह नया प्रस्ताव उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

समिति ने चेतावनी दी कि यदि दोनों प्रस्तावित बांध परियोजनाओं को तत्काल निरस्त नहीं किया गया, तो आदिवासी समाज व्यापक आंदोलन करेगा। कार्यक्रम में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रायसाराम खेर, राजूराम, कमला शंकर खेर सहित कई ग्रामीण नेता मौजूद रहे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *