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माइनिंग क्षेत्र में ड्राई टेलिंग तकनीक बचाएगा लाखों लीटर पानी

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माइनिंग क्षेत्र में ड्राई टेलिंग तकनीक बचाएगा लाखों लीटर पानी

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जावर माइंस में देश का पहला ड्राई ट्रेलिंग प्लांट
उदयपुर, 4 दिसंबर:
खनन उद्योग में पानी की भारी खपत को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हिंदुस्तान जिंक ने उदयपुर जिले में टीडी के समीप जावर माइंस में देश का पहला ड्राई टेलिंग सिस्टम स्थापित किया है। यह तकनीक खनन में निकलने वाले चट्टानों के पाउडर से पानी को अलग करने पर आधारित है, जिससे प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की बचत संभव हो रही है। विशेषज्ञ इसे भूमिगत माइनिंग की सबसे लाभकारी प्रक्रिया मान रहे हैं।
फिल्टर प्रेस से एक कदम आगे, छोटे उद्योगों को भी लाभ
माइनिंग और जल संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. अनूप भटनागर के अनुसार ड्राई टेलिंग तकनीक फिल्टर प्रेस से कहीं अधिक उन्नत है। फिल्टर प्रेस ने पहले ही छोटी माइनिंग और मार्बल इकाइयों में पानी की खपत कम की है, वहीं ड्राई टेलिंग अपनाने से इसे और अधिक घटाया जा सकता है। इससे न केवल जल संरक्षण होगा, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव भी काफी कम होगा।
क्या है ड्राई टेलिंग सिस्टम?
ड्राई टेलिंग सिस्टम एक विशिष्ट प्रक्रिया है, जिसमें टेलिंग — यानी चट्टानों के पाउडर और रॉक के मिश्रण — से पानी को तेज़ी से अलग किया जाता है। यह तकनीक 80 से अधिक पुनर्गठन प्रक्रियाओं से गुजरकर पूरी होती है। खनिज और धातुएँ निकालने के बाद बचा यह पाउडर सामान्यतः व्यर्थ हो जाता है, लेकिन हिंदुस्तान जिंक इसे बैकफिल के रूप में भूमिगत माइनिंग को स्थिर करने के लिए पुन: उपयोग में लेता है। शेष टेलिंग को पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक जोखिमों को न्यूनतम रखने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए टेलिंग स्टोरेज में सुरक्षित रखा जाता है।
जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम
ड्राई टेलिंग तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि खदान बंद होने के बाद भी इस प्रक्रिया से पुनः प्राप्त पानी भविष्य के उपयोग के लिए उपलब्ध रहता है। उदयपुर में स्थापित यह सिस्टम न केवल माइनिंग सेक्टर के लिए मॉडल साबित हो सकता है, बल्कि लघु खनन इकाइयों के लिए भी नई दिशा प्रदान करेगा।
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