दो पत्नियों के दावे पर हाईकोर्ट ने कहा- नॉमिनी नहीं बनता मालिक
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राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की उदयपुर की महिला की लंबित याचिका, पेंशन विवाद सिविल कोर्ट में निपटाने का आदेश
उदयपुर, 5 दिसम्बर: राजस्थान हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर दो महिलाओं के बीच लंबित विवाद में साफ निर्देश दिया है कि नॉमिनेशन में नाम होने से किसी को पेंशन या संपत्ति का स्वामित्व नहीं मिल सकता। जस्टिस फरजंद अली की अदालत ने स्पष्ट किया कि नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी की तरह होता है, असली हकदार वही है जो कानूनन उत्तराधिकारी हो।
मामला राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के रिटायर्ड असिस्टेंट जोनल मैनेजर मूलसिंह देवल की पेंशन से जुड़ा है। उदयपुर निवासी याचिकाकर्ता आनंद कंवर ने दावा किया कि पीपीओ में उनका नाम पत्नी के रूप में है, जबकि प्रतिवादी सायर कंवर ने अपने सीपीएफ फॉर्म और राशन कार्ड में नाम होने का हवाला दिया।
कोर्ट ने विवाह की वैधता और असली पत्नी का निर्धारण अपने अधिकार क्षेत्र में न होने की बात कही और दोनों पक्षों को सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करने की अनुमति दी। न्यायालय ने यह भी कहा कि एक समय में दो पत्नियों को वैध नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट उम्र को ध्यान में रख प्राथमिकता से सुनवाई करे और एक वर्ष के भीतर निर्णय दे। साथ ही सरकार को सुझाव दिया गया कि पेंशन नियमों में संशोधन कर नॉमिनेशन, शादी टूटने और उत्तराधिकार संबंधी प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद उत्पन्न न हों।
