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रोडवेज में बिना टिकट बुक हुए ऑनलाइन पैसा कट गया तो रिफंड के लिए भटकते रहेंगे आप..!

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रोडवेज में बिना टिकट बुक हुए ऑनलाइन पैसा कट गया तो रिफंड के लिए भटकते रहेंगे आप..!

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-रोडवेज ऑनलाइन बुकिंग में बुक टिकट के पीएनआर से कैंसिलेशन का विकल्प
-पीएनआर से ही रिफंड ट्रैकिंग का सिस्टम
उदयपुर, 8 दिसम्बर :
यदि आप रोडवेज में ऑनलाइन बुकिंग करा रहे हैं तो सावधान हो जाएं, यदि टिकट बिना बुक हुए तकनीकी कारणों से आपका पेमेंट कट गया है तो रिफंड के लिए आपका परेशान होना तय है। तकनीकी कारणों से टिकट बुक हुए बिना भुगतान कटने पर उपभोक्ता को न सही जानकारी मिलती है, न किसी अधिकारी से स्पष्ट जवाब। उपभोक्ता बस एक नंबर से दूसरे नंबर तक भटकते रह जाते हैं, लेकिन समस्या का समाधान कहीं नहीं मिलता। डिजिटल सुविधा का लाभ देने के बजाय यह प्रणाली उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा रही है।
मौजूदा व्यवस्था में राजस्थान रोडवेज की वेबसाइट पर केवल उन्हीं मामलों में रिफंड का ऑप्शन उपलब्ध है, जहां टिकट सफलतापूर्वक बुक हो चुका हो और पीएनआर नंबर जेनरेट हुआ हो। ऐसे टिकट को यात्री पीएनआर का उपयोग कर कैंसिल भी कर सकता है और उसी नंबर से रिफंड की स्थिति भी ट्रैक की जा सकती है।
लेकिन बड़ा मसला तब खड़ा होता है जब तकनीकी कारणों से टिकट बने बिना ही यात्री के खाते से पैसा कट जाता है। ऐसे मामलों में संपर्क कहां करना है, इसकी कोई स्पष्ट गाइडलाइन वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। रोडवेज द्वारा दिया गया कस्टमर केयर नंबर 1800-2000-103 लगातार नो-रिस्पॉन्स रहता है। दूसरे नंबर 7412069719 पर कॉल करने पर यात्रियों को ‘डेटा सेंटर से बात करने’की सलाह दी जाती है, लेकिन डेटा सेंटर का नंबर 7412069699 भी कभी रिसीव नहीं होता।
उदयपुर बस स्टैंड से पूछताछ करने पर उपभोक्ताओं को rsrtc.cmudp@gmail.com पर मेल भेजने की सलाह दी जाती है। लेकिन यह मेल उदयपुर के स्थानीय मुख्य प्रबंधक का है और इस पर मेल भेजने के बाद किसी भी तरह का रिप्लाई नहीं मिलने पर उपभोक्ता को यह भी पता नहीं चल पाता कि उसकी मेल को अधिकारी द्वारा देखा गया भी है या नहीं, और संबंधित अधिकारी तक उसकी मेल पहुंची भी है या नहीं।
स्थानीय अधिकारी भी मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं क्योंकि पूरा सिस्टम जयपुर मुख्यालय से संचालित होता है। उपभोक्ता चाहे कितनी ही कोशिश कर ले, न शिकायत दर्ज होती है और न रिफंड की स्थिति स्पष्ट होती है। यही कारण है कि रोडवेज की ऑनलाइन टिकटिंग व्यवस्था पर यात्रियों का विश्वास तेजी से घट रहा है।
प्रोफेशनल नहीं बन पा रही रोडवेज
सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने और सेवाओं के प्रोफेशनल होने की बात कह रही है, वहीं रोडवेज की ऑनलाइन व्यवस्था सरकारी ढर्रे से बाहर निकलती नजर नहीं आती। उपभोक्ता उम्मीद करता है कि विभाग ऐसे मामलों में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करे, सक्रिय हेल्पलाइन दे और भुगतान कटने पर रिफंड प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाए।
निजी कम्पनियों में मेल की बनती है ट्रेल
आज की आधुनिक दुनिया में किसी भी निजी कम्पनी की हेल्प-डेस्क को जब कोई मेल प्राप्त होती है तब उपभोक्ता को रिप्लाई मेल तो जाती ही है, साथ ही समस्या से जुड़े जिस अधिकारी को मेल फॉरवर्ड होती है, उस लूप में उपभोक्ता की मेल को भी रखा जाता है, ताकि उपभोक्ता को यह जानकारी रहे कि उसकी समस्या किसके पास फॉरवर्ड की गई है। लेकिन, ऐसा लूप सरकारी महकमों में कम ही दिखता है और रोडवेज जैसे सीधे जनता से जुड़े महकमे में इसकी कमी रोडवेज के आधुनिकीकरण के दावों पर सवालिया निशान लगाती है।
ग्रिवेंस ऑप्शन की दरकार
रोडवेज के कर्मचारी और अधिकारी भी इस बात पर सहमति जताते हैं कि ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल पर ग्रिवेंस मेल का भी ऑप्शन होना चाहिए, जिससे उपभोक्ता अपनी परेशानी वहां दर्ज करा सके और मेल भेजने के बाद उसके पास रिसीविंग का भी रिप्लाई आना चाहिए।

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