विक्रम भट्ट का कमर दर्द बना पुलिस के लिए सरदर्द
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रुकते-रुकते आना पड़ा उदयपुर
विक्रम भट्ट के PSO से भिड़ी उदयपुर पुलिस, आधा घंटा नहीं खुला दरवाज़ा
CCTV पर देखते रहे विक्रम-श्वेतांबरी, बाहर पुलिस इंतजार करती रही: देर रात दोनों दबोचे गए
दोनों पर बायोपिक बनाने के नाम पर 30 करोड़ की धोखाधड़ी का है आरोप
उदयपुर, 8 दिसंबर: बॉलीवुड निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद विक्रम भट्ट को सड़क मार्ग से उदयपुर लाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वे पुराने कमर दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके कारण लंबी सड़क यात्रा उनके लिए मुश्किल बताई गई है। यही वजह है कि पुलिस टीम हर 15-20 किलोमीटर पर वाहन रोककर उन्हें आराम दे रही है, ताकि उनकी सेहत पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके साथ ही पूरे सफर में मेडिकल टीम सतर्कता बनाए हुए है। उदयपुर पहुंचने पर मंगलवार को उन्हें एसीजेएम-4 की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस द्वारा रिमांड की मांग की जा सकती है। वहीं, उनके अधिवक्ता जे.के. दवे ने संकेत दिया है कि जमानत के लिए आवेदन दाखिल किया जाएगा।
इससे पहले, रविवार को गिरफ्तारी की कार्रवाई बेहद नाटकीय रही। उदयपुर पुलिस की एक विशेष टीम 3 दिसंबर को ही मुंबई पहुंच चुकी थी और चार दिनों तक गुप्त रूप से रैकी करती रही। टीम ने विक्रम भट्ट के ठिकानों की पहचान की और बिना किसी प्रचार के उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। मुंबई पुलिस से भी केवल आवश्यक जानकारी साझा की गई, ताकि अभियान गोपनीय बना रहे।
रविवार को जैसे ही पुख्ता सूचना मिली कि विक्रम और श्वेतांबरी उनकी साली के जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स में मौजूद हैं, पुलिस ने तुरंत दबिश दी। यह वही स्थान है जहां कई नामी बॉलीवुड हस्तियां रहती हैं। पुलिस जब कॉम्प्लेक्स के भीतर पहुंची, तो विक्रम भट्ट के 3-4 निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) ने रास्ता रोक दिया और टीम से पूछताछ शुरू कर दी। उन्होंने यह दावा किया कि भट्ट दंपती घर पर मौजूद नहीं हैं। बाद में यह पता चला कि दोनों पति-पत्नी CCTV कैमरों से पूरी स्थिति देख रहे थे और बाहर पुलिस को रोका जा रहा था।
लगातार दबाव के बावजूद PSO दरवाजा खुलवाने में देरी करवाते रहे। पुलिस लगभग आधे घंटे तक दरवाज़ा खटखटाती रही, लेकिन भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। स्थिति गंभीर होती देख पुलिस ने सख्त रुख अपनाया, जिसके बाद आखिरकार दरवाजा खोला गया। अंदर मौजूद विक्रम और श्वेतांबरी ने गिरफ्तारी का विरोध किया और पुलिसकर्मियों से बहस भी की, लेकिन अंततः दोनों को हिरासत में ले लिया गया। उस समय घर में उनके बच्चे, नौकर और सुरक्षा कर्मी भी मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे पहले सह-निर्माता महबूब अंसारी और वेंडर संदीप विश्वनाथ त्रिभुवन को 18 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। मुख्य आरोपी और बिचौलिया उदयपुर निवासी दिनेश कटारिया अब भी फरार है और माना जा रहा है कि वह मुंबई में ही कहीं छिपा हुआ है।
यह पूरा मामला उदयपुर के उद्योगपति और डॉक्टर अजय मुर्डिया की शिकायत से शुरू हुआ था। आरोप है कि उनकी पत्नी की बायोपिक और चार फिल्मों के निर्माण के नाम पर उनसे 30 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि ली गई। डॉक्टर के अनुसार उन्हें 200 करोड़ तक लाभ का लालच दिया गया था, लेकिन सहमति के अनुसार प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए गए। एक फिल्म 25% तक बनी, दो फिल्में अधूरी रहीं, जबकि चौथी फिल्म पर काम तक शुरू नहीं हुआ।
