अस्पताल–बीमा कंपनियों के विवाद से बढ़ रहा मरीजों पर आर्थिक बोझ
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महिमा कुमारी मेवाड़ ने संसद में उठाया गंभीर मुद्दा
राजसमंद, 9 दिसम्बर : राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने संसद में नियम 377 के तहत देशभर के मरीजों से जुड़े एक गंभीर विषय को उठाते हुए अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच बढ़ते विवाद पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस खींचतान का सबसे बड़ा खामियाज़ा आम मरीज झेल रहे हैं, जिन्हें बीमा कवरेज होने के बावजूद उपचार के दौरान भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
मेवाड़ ने बताया कि कैशलेस इलाज में अड़चन, टैरिफ निर्धारण में असमानता, बिलिंग विवाद और भुगतान में देरी जैसी स्थितियों के चलते मरीजों को खुद भुगतान करना पड़ रहा है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च और बीमा प्रीमियम—दोनों का बोझ उन पर एक साथ आ जाता है। उन्होंने कहा कि जहाँ अस्पताल अधिक दरों पर भुगतान की मांग करते हैं, वहीं बीमा कंपनियां अत्यधिक बिलिंग के संदेह में भुगतान रोक देती हैं, जिससे मरीज बीच में फंस जाते हैं। कई मामलों में दावा अस्वीकृत होने की वजह से मरीज और उनके परिजन मानसिक व आर्थिक संकट में घिर जाते हैं।
सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बीमाधारकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी नीतिगत कदम उठाए जाएं, ताकि अस्पतालों और बीमा कंपनियों के विवादों का त्वरित निपटान हो सके तथा मरीजों को समय पर और सुगम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
