उदयपुर से वंदेभारत और नई रेल सेवाओं का विस्तार जरूरी: सांसद डॉ. रावत
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रेल मंत्री से मिलकर रखीं कई महत्वपूर्ण मांगें; मेवाड़-दक्षिण भारत कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर
उदयपुर, 10 दिसंबर: सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने बुधवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर उदयपुर सहित मेवाड़ की रेल सेवाओं के विस्तार और सुधार से जुड़ी महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने उमरड़ा में प्रस्तावित रेलवे यार्ड को वैकल्पिक सरकारी भूमि पर स्थानांतरित करने, चित्तौड़गढ़-उदयपुर रेलवे लाइन का दोहरीकरण करने, तथा उदयपुर-सूरत वंदेभारत ट्रेन शुरू करने पर जोर दिया। रेल मंत्री ने इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार का आश्वासन दिया।
वंदेभारत ट्रेन को सूरत तक बढ़ाने की मांग
सांसद रावत ने कहा कि प्रस्तावित उदयपुर-असारवा वंदेभारत ट्रेन को सूरत तक बढ़ाया जाए क्योंकि मेवाड़ व बांसवाड़ा-वागड़ क्षेत्र से लाखों लोग व्यापार और कामकाज के लिए सूरत आते-जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन असारवा स्टेशन पर 7 घंटे से अधिक खड़ी रहती है, ऐसे में इसका विस्तार सूरत तक करना अत्यंत उपयोगी होगा।
उदयपुर-चंदेरिया रेल लाइन का दोहरीकरण जरूरी
उन्होंने बताया कि पर्यटन और यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उदयपुर-चंदेरिया रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण अब समय की मांग है। अजमेर-चंदेरिया मार्ग का दोहरीकरण कार्य प्रगति पर है, ऐसे में उदयपुर तक इसका विस्तार होने से रेल सेवाएं और सक्षम होंगी।
अन्य महत्वपूर्ण रेल मांगें
सांसद ने रेलवे मंत्री के समक्ष निम्न मांगें भी रखीं—
उदयपुर–योगनगरी ऋषिकेश ट्रेन को देहरादून तक बढ़ाया जाए।
उदयपुर–बांदा टर्मिनस ट्रेन को दैनिक चलाकर रूट वाया अहमदाबाद किया जाए।
आगरा–असारवा एक्सप्रेस को पुनः नियमित रूप से चलाया जाए।
रानीखेत एक्सप्रेस (अजमेर–काठगोदाम) को उदयपुर तक बढ़ाया जाए।
मुंबई–अहमदाबाद गुजरात मेल का उदयपुर तक विस्तार किया जाए।
उमरड़ा रेलवे यार्ड के भूमि अधिग्रहण पर आपत्ति
डॉ. रावत ने उमरड़ा रेलवे स्टेशन के पास बनाए जाने वाले प्रस्तावित रेलवे यार्ड के लिए जनजाति समुदाय की आबादी भूमि अधिग्रहित किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे लगभग 300 कास्तकार प्रभावित हो रहे हैं और स्थानीय रोजगार संकट में है, जबकि यार्ड के लिए पास ही सरकारी भूमि उपलब्ध है। उन्होंने इसे विकल्प के रूप में उपयोग करने का सुझाव दिया। सांसद ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित मांगें पूरी होने पर मेवाड़ क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी दक्षिण भारत और प्रमुख व्यापारिक नगरों से और मजबूत होगी।
