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डूंगरपुर जिला अस्पताल में पार्किंग ठेके पर घमासान

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डूंगरपुर जिला अस्पताल में पार्किंग ठेके पर घमासान

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बीएपी कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं की गाड़ियां रोकीं, जबरन कटवाई पार्किंग रसीद
डूंगरपुर, 15 दिसम्बर:
डूंगरपुर जिला अस्पताल में पार्किंग ठेके को लेकर विवाद सोमवार को उस समय और गहरा गया, जब भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) के जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में भाजपा नेताओं और अधिकारियों की गाड़ियों को रोक लिया। बीएपी कार्यकर्ताओं ने अस्पताल गेट पर खड़ी गाड़ियों की जबरन पार्किंग रसीद कटवाई, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।
बीएपी जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने बताया कि जिला अस्पताल में पार्किंग ठेका जनविरोधी है। इससे पहले चौरासी विधायक अनिल कटारा और बीएपी जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में पार्किंग शुल्क के खिलाफ धरना दिया गया था। उस दौरान चेतावनी दी गई थी कि यदि तीन दिन में ठेका समाप्त नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इसके बाद करीब पांच दिनों तक अस्पताल में आने वाले मरीजों और परिजनों से पार्किंग शुल्क नहीं लिया गया।
हालांकि रविवार से दोबारा पार्किंग शुल्क वसूले जाने की सूचना मिलने पर सोमवार को बीएपी कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे और विरोध दर्ज कराया।
सोमवार को जिला स्तरीय आरोग्य शिविर में भाग लेकर लौट रहे भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष हकरू मईडा, पूर्व सांसद कनकमल कटारा, नगर परिषद सभापति अमृतलाल कलासुआ, उपसभापति सुदर्शन जैन और सीएमएचओ डॉ. अलंकार गुप्ता की गाड़ियों को बीएपी कार्यकर्ताओं ने अस्पताल गेट पर रोक लिया।
बीएपी जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि गरीब मरीजों और उनके परिजनों से तो पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है, लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से नहीं। इसी को लेकर सभी की गाड़ियों की पार्किंग रसीद कटवाई गई, जिसके बाद उन्हें आगे जाने दिया गया।
जनहित का मुद्दा, पार्टी का नहीं : बीएपी
अनुतोष रोत ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जनहित का मुद्दा है। उदयपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में जिला अस्पतालों में पार्किंग निशुल्क है, जबकि डूंगरपुर में गरीब मरीजों से शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने पार्किंग ठेका रद्द कर अस्पताल परिसर में निशुल्क पार्किंग व्यवस्था लागू करने की मांग की। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अव्यवस्थित पार्किंग के कारण कई बार एंबुलेंस को आने-जाने में परेशानी होती है। इसी समस्या को देखते हुए सरकारी नियमों के तहत पार्किंग ठेका दिया गया है, ताकि व्यवस्था बनी रहे। फिलहाल इस मामले को लेकर अस्पताल परिसर में चर्चा और तनाव का माहौल बना हुआ है।

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