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विक्रम भट्ट गिरफ्तारी मामला हाईकोर्ट में गंभीर मोड़ पर

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विक्रम भट्ट गिरफ्तारी मामला हाईकोर्ट में गंभीर मोड़ पर

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IG–SP की पेशी, 42 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट विवाद पर फैसला सुरक्षित
सीबीआई जांच के दायरे में लाने पर भी विचार
उदयपुर/जोधपुर, 15 दिसंबर :
फिल्म प्रोड्यूसर–डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट की गिरफ्तारी के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरे प्रकरण की गंभीरता पर सवाल खड़े किए हैं। करीब डेढ़ घंटे चली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एकलपीठ जस्टिस समीर जैन ने उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव और एसपी योगेश गोयल को वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए। दोनों वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से अदालत ने प्रारंभिक जांच, गिरफ्तारी की प्रक्रिया और मामले की प्रकृति को लेकर विस्तृत सवाल किए।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 42 करोड़ रुपए के फिल्म निर्माण कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी एफआईआर पर फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने एक चरण पर यह भी टिप्पणी की कि यदि आवश्यक हुआ तो पूरे मामले को सीबीआई जांच के दायरे में लाने पर भी विचार किया जा सकता है, हालांकि इस पर फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया।
क्या है पूरा मामला
राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मूर्डिया ने विक्रम भट्ट से एक फिल्म के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपए का अनुबंध किया था। बाद में धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाते हुए 17 नवंबर को उदयपुर में भट्ट समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
जांच के दौरान उदयपुर पुलिस ने पहले को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी और कथित फर्जी वेंडर संदीप को मुंबई से गिरफ्तार किया। इसके बाद 7 दिसंबर को विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को मुंबई स्थित फ्लैट से गिरफ्तार कर 9 दिसंबर को उदयपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सात दिन की पुलिस रिमांड ली गई।
सिविल विवाद या आपराधिक मामला?
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र गोदारा ने तर्क दिया कि यह पूरा मामला कॉन्ट्रैक्चुअल और सिविल प्रकृति का है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण के लिए हुआ अनुबंध विधिवत लागू किया गया था और बिना पर्याप्त प्रारंभिक जांच के गिरफ्तारी की गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और भजनलाल केस का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
सरकारी पक्ष की दलील
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं के कर्मचारियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रारंभिक जांच की गई, जिसके बाद ही गिरफ्तारी की गई। सरकारी पक्ष ने आरोप लगाया कि भट्ट ने प्रोजेक्ट में अतिरंजित खर्च दिखाकर धोखाधड़ी और विश्वासघात किया है, जो आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।
आज उदयपुर की अदालत में पेश किए जाएंगे भट्ट दंपती
सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद मंगलवार को भट्ट दंपती को उदयपुर की अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुंबई में भट्ट के ऑफिस की तलाशी से कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, हालांकि फिलहाल नई रिमांड की मांग नहीं की जाएगी और दंपती को न्यायिक हिरासत में भेजने की अपील की जाएगी। फिलहाल सबकी नजरें हाईकोर्ट के उस फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि यह मामला सिविल विवाद है या आपराधिक जांच के दायरे में आगे बढ़ेगा।

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