अब फतेहसागर के पास बन सकेंगे होटल
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ग्रीन जोन-1 से हटकर जोन-2 में मानी जमीन
उदयपुर मास्टर प्लान में ‘ड्राफ्टिंग एरर’ सुधार पर हाईकोर्ट का आदेश
उदयपुर, 17 दिसम्बर: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने उदयपुर मास्टर प्लान-2031 के लैंड यूज मैप में हुई ‘ड्राफ्टिंग एरर’ को सुधारने का निर्देश दिया है। जस्टिस सुनील बेनीवाल ने 17 दिसंबर को दो जुड़े मामलों में राज्य सरकार को आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं की जमीन को ग्रीन जोन-1 (G-1) से हटा कर ग्रीन जोन-2 (G-2) में स्थानांतरित किया जाए।
कोर्ट ने पाया गलती
कोर्ट ने माना कि फतेहसागर झील के फुल टैंक लेवल (FTL) से 100 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित जमीन को गलती से G-1 जोन में दर्शाया गया था, जबकि यह G-2 में आती है। मामले में याचिकाकर्ता पीयूष मारू, चिराग मारू, मोनिका और सोनाली की जमीन सिसारमा गांव में स्थित है। मास्टर प्लान-2031 में इसे गलती से G-1 दिखाया गया था, जिससे होटल/रिसॉर्ट निर्माण में बाधा आ रही थी।
यूआईटी ने पहले माना ड्राफ्टिंग एरर
सुनवाई के दौरान सामने आया कि UIT (अब UDA) ने 2019 में स्वीकार किया था कि जमीन का ग्रीन जोन-1 में दिखना केवल ड्राफ्टिंग एरर है। 2022 में भी UIT ने स्पष्ट किया कि जमीन फतेहसागर FTL से 129-150 मीटर दूर है और G-2 में आती है। बावजूद इसके, सरकार ने अचानक रुख बदलकर कोर्ट में अपने ही आदेश को रद्द करने की अर्जी दायर की।
सरकार की दलीलें खारिज
अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं ने 2018 में जमीन खरीदी थी और उन्हें G-1 जोन का पता था। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि निजी हित को सार्वजनिक हित से ऊपर नहीं रखा जा सकता। याचिकाकर्ता केवल मैप में हुई तकनीकी गलती का सुधार चाहते हैं।
फैसला और आदेश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार एक महीने के भीतर पीयूष मारू व अन्य के मामलों में मास्टर प्लान-2031 और जोनल डेवलपमेंट प्लान में सुधार करे। गोविंद अग्रवाल के मामले में UDA को मौके पर जाकर दूरी मापने और रिपोर्ट सरकार को भेजने का निर्देश दिया गया। इस फैसले से फतेहसागर के पास होटल निर्माण का रास्ता स्पष्ट हो गया है और मास्टर प्लान-2031 में ग्रीन जोन-1 और ग्रीन जोन-2 के बीच तकनीकी त्रुटियों को दूर करने का रास्ता खुल गया है।
