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सरकारी स्कूलों की जिला रैंकिंग के मापदंड बदले

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सरकारी स्कूलों की जिला रैंकिंग के मापदंड बदले

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अब 12 नए पैरामीटर पर होगा शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन
उदयपुर, 18 दिसम्बर
: प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक माहौल और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी ढंग से परखने के उद्देश्य से जिला रैंकिंग के मापदंडों में बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग ने दिसंबर माह से लागू होने वाले नए मानकों के तहत अब जिलों का मूल्यांकन 12 अलग-अलग पैरामीटर के आधार पर करने का निर्णय लिया है। इससे स्कूलों के प्रदर्शन का समग्र और पारदर्शी आकलन संभव हो सकेगा।
शिक्षा, गवर्नेंस और राज्य प्राथमिकता के मानक
नई जिला रैंकिंग व्यवस्था में शिक्षा से जुड़े 8, गवर्नेंस से जुड़े 2 और राज्य की प्राथमिकताओं से संबंधित 2 पैरामीटर शामिल किए गए हैं। इन मापदंडों के आधार पर प्रत्येक जिले के सरकारी स्कूलों की रैंकिंग तय की जाएगी।
शैक्षणिक गतिविधियों पर रहेगा फोकस
शिक्षा से जुड़े मानकों में विद्यार्थियों की उपस्थिति, सीबीए और ओआरएफ परिणाम, बोर्ड परीक्षा के नतीजे, अभ्यास पुस्तिका और वर्कबुक का कार्य, एबीएल किट का उपयोग, गृह कार्य तथा मिशन स्टार्ट टाइम टेबल जैसे बिंदु शामिल किए गए हैं। ये सभी विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।
प्रबंधन और सुविधाओं का भी मूल्यांकन
गवर्नेंस से जुड़े मापदंडों में निरीक्षण लक्ष्य की पूर्ति और शिक्षक ऐप की उपयोगिता को शामिल किया गया है। वहीं राज्य की प्राथमिकताओं के तहत शाला स्वास्थ्य, शौचालय की उपलब्धता और शुद्ध पेयजल व्यवस्था को रैंकिंग का आधार बनाया गया है।
अधिकारियों को दिए निर्देश
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में सभी जिला एवं ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर शाला संबलन ऐप, शाला दर्पण पोर्टल और शिक्षक ऐप पर दिसंबर से नए पैरामीटर के अनुसार जानकारी अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।

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