LOADING

Type to search

अरावली बचाने सड़क पर उतरा भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा

Local

अरावली बचाने सड़क पर उतरा भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा

Share

नई परिभाषा से 90% पहाड़ियां बाहर होने का दावा, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
डूंगरपुर, 23 दिसंबर
: सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला के लिए स्वीकृत नई परिभाषा के विरोध में सोमवार को डूंगरपुर में भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने जोरदार प्रदर्शन किया। अरावली बचाओ अभियान के तहत कलेक्ट्रेट पर जुटे कार्यकर्ताओं ने इसे पर्यावरण और आदिवासी जीवन के लिए गंभीर खतरा बताते हुए फैसले पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शन के बाद मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
मोर्चा नेताओं ने बताया कि नए मानक के तहत केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृति को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। इससे अरावली की 90 प्रतिशत से अधिक पहाड़ियां कानूनी संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी। उनका आरोप है कि यह परिभाषा खनन माफिया और भू-माफियाओं को खुली छूट देने जैसी है, जिससे पर्वतमाला का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।
नेताओं ने चेतावनी दी कि अरावली को कानूनी तौर पर कमजोर करने से जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण, जलस्रोतों के सूखने और वनों के विनाश की प्रक्रिया तेज होगी। आदिवासी अंचलों में अरावली जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा की रीढ़ रही है। सदियों से आदिवासी समुदायों ने इन पहाड़ों की रक्षा की है और ऐतिहासिक रूप से अरावली ने सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को भी संबल दिया है। मोर्चा ने कहा कि नई परिभाषा का सीधा असर किसानों, पशुपालकों और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। इसी चिंता को लेकर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *