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अरावली पर्वतमालाएँ: चोटी-चोटी पर विराजते हैं देवी-देवता, श्रद्धालुओं में अटूट आस्था

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अरावली पर्वतमालाएँ: चोटी-चोटी पर विराजते हैं देवी-देवता, श्रद्धालुओं में अटूट आस्था

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राजेश वर्मा
उदयपुर, 23 दिसंबर:
केंद्र सरकार की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के 100 मीटर ऊँचाई वाली पहाड़ी को अरावली नहीं मानने के आदेश के विरोध में पूरे देश में विरोध की आवाज़ उठ रही है। लेकिन इस बहस में अक्सर यह भूल जाता है कि हमारी अरावली पर्वतमालाओं पर देवी-देवताओं का वास है और इनके प्रति आमजन की श्रद्धा पीढ़ियों से अटूट रही है। मेवाड़ की अरावली पर्वत श्रृंखला में हर चोटी पर कोई न कोई प्राचीन मंदिर विराजित है, जिसे श्रद्धालु अपनी भक्ति और विश्वास के साथ पूजते हैं।
उदयपुर में प्रमुख मंदिर जो अरावली की चोटी पर स्थित हैं: फतहसागर झील के देवाली छोर पर स्थित नीमच माता मंदिर, करणी माता का मंदिर माछला मगरा पर, और शहर से 18 किमी दूर उबेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख हैं। इन मंदिरों के पास रोप-वे का निर्माण पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किया गया है। प्रतिवर्ष हजारों कावड़िए उबेश्वरजी पहुंच कर जलाभिषेक करते हैं।
मेवाड़ की अन्य प्रमुख चोटी मंदिरें: बेड़वास में अशोका माता, चित्रकूटनगर में चौथमाता, तितरड़ी में गुप्तेश्वर महादेव, कैलाशपुरी में बड़वासन माता, चिरवा में भिण्ड ऋषि व सिंह ऋषि मंदिर, मावली में धूणी माता, कुंभलगढ़ दुर्ग में वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की कुलदेवी, राजसमंद में राज माता मंदिर और चित्तौड़गढ़ दुर्ग में कालिका माता मंदिर शामिल हैं।
मरुस्थलीय क्षेत्र और मारवाड़ की अरावली: माउंट आबू पर महादेव मंदिर, मेवाड़-मारवाड़ सीमा पर परशुराम महादेव, जोधपुर में चामुंडा माता मंदिर जैसी धार्मिक स्थलियाँ भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र हैं। इहर मंदिर अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और पर्वतीय सौंदर्य का प्रतीक है। अरावली की ये चोटी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र हैं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण का भी मार्ग प्रशस्त करती हैं।

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