LOADING

Type to search

धर्म की आड़ में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं: राजनाथ सिंह

popular

धर्म की आड़ में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं: राजनाथ सिंह

Share

कहा—शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है
डॉक्टर के हाथों में आरएक्स की जगह आरडीएक्स होना समाज के लिए अत्यंत विचलित करने वाला संकेत
उदयपुर, 2 जनवरी:
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि धर्म की आड़ में आतंकवाद किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। हाल ही में दिल्ली में हुए बम धमाकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे डॉक्टर के हाथों में आरएक्स की जगह आरडीएक्स होना समाज के लिए अत्यंत विचलित करने वाला संकेत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म के साथ संस्कार और दायित्वबोध का होना जरूरी है।
राजनाथ सिंह शुक्रवार को उदयपुर में बीएन यूनिवरसिटी के 104 वें स्थापना दिवस समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा वही सफल मानी जाती है जो धर्म को धारण कराए। यहां धर्म का आशय किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि वह चेतना और नैतिकता है, जो मानव चरित्र का निर्माण करती है। शिक्षा केवल रोजगार पाने का साधन नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और आंतरिक शक्तियों के विकास का माध्यम है।
युवाओं के हाथों में देश का भविष्य
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज देश के पास डाटा, नॉलेज और विजन की कोई कमी नहीं है, लेकिन यदि किसी चीज की कमी है तो वह विस्डम (प्रज्ञा) की है। विद्यार्थियों को अपने भीतर के विद्यार्थी को हमेशा जीवित रखना चाहिए। शिक्षकों से उन्होंने आग्रह किया कि वे केवल पढ़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों को कैसे सोचना है, यह सिखाने वाले बनें।
उन्होंने कहा कि तकनीक को अपनाते हुए नवाचार को बढ़ावा देना और भारत को विकसित राष्ट्र बनाना आज की युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सशक्त आवाज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब आज भारत बोलता है तो पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है, और इसके पीछे देश के विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
अहंकार मुक्त मन से ही सच्ची सफलता
रक्षा मंत्री ने कहा कि मनुष्य केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से विभूषित होता है। जीवन में सच्ची सफलता के लिए मन को अहंकार से मुक्त रखना आवश्यक है। अहंकार रहित मन से ही स्थायी सुख और परमानंद की अनुभूति संभव है। उन्होंने आत्मनिर्भरता को जीवन की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार देश को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
नई शिक्षा नीति पर जोर
राजनाथ सिंह ने नई शिक्षा नीति-2020 को परंपरा और आधुनिकता का संतुलित संगम बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ऐसा दृष्टिकोण निहित है, जो ज्ञान को केवल बौद्धिक नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी बनाता है। मल्टीडिसिप्लिनरी और इंटरडिसिप्लिनरी शिक्षा से एक विचारशील, संवेदनशील और चरित्रवान पीढ़ी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
आश्वासनों से विश्वास का संकट
राजनीति में आश्वासनों पर टिप्पणी करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए दिए गए वादों से विश्वास का संकट पैदा हुआ है। इसलिए वे यहां कोई आश्वासन नहीं दे रहे, बल्कि प्रयास करने की बात कह रहे हैं।
महापुरुषों के नाम का दुरुपयोग न हो: मेवाड़
नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए महापुरुषों के नाम का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने पाठ्यक्रमों में मेवाड़ के इतिहास को लेकर सुधार की मांग भी की। मंच पर मौजूद केंद्रीय मंत्री और सांसदों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने संस्थान की भूमिका पर भी टिप्पणी की।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *