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चित्तौड़गढ़ में श्रीसांवलियाजी की तर्ज पर बन रहा लक्ष्मीनारायण मंदिर

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चित्तौड़गढ़ में श्रीसांवलियाजी की तर्ज पर बन रहा लक्ष्मीनारायण मंदिर

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1800 वर्गफीट क्षेत्र में निर्माण, 21 फीट ऊंचा होगा भव्य शिखर
चित्तौड़गढ़, 6 जनवरी:
चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर की तर्ज पर अब लक्ष्मीनारायण भगवान का एक भव्य मंदिर तैयार किया जा रहा है। यह मंदिर डूंगला उपखंड के कुम्हार खेड़ा गांव में बनाया जा रहा है, जहां गांव के करीब 150 मेनारिया ब्राह्मण परिवारों ने सामूहिक रूप से इसके निर्माण का संकल्प लिया है।
ग्रामीणों के अनुसार मंदिर निर्माण पर करीब 80 लाख रुपए की लागत अनुमानित है, जिसमें से अब तक लगभग 60 लाख रुपए का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। मंदिर का निर्माण करीब 1800 वर्गफीट क्षेत्रफल में किया जा रहा है और कार्य तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है।
मंदिर का विधिवत भूमिपूजन और शिलान्यास 22 फरवरी 2024 को किया गया था। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान हुए, जिनमें पूरे गांव के लोग शामिल हुए। उसी दिन से मंदिर निर्माण का कार्य निरंतर जारी है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका निर्माण किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता से हो रहा है। गांव के लगभग 150 परिवारों ने अपनी-अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग किया है। ग्रामीणों का मानना है कि यह मंदिर एकता, विश्वास और सहयोग का प्रतीक बनेगा।
पारंपरिक स्थापत्य शैली में निर्माण, लाल पत्थर से बन रहा भव्य मंदिर
मंदिर को पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली में बनाया जा रहा है। मंदिर का शिखर करीब 21 फीट ऊंचा होगा, जो इसकी भव्यता को दर्शाएगा। स्तंभों, दीवारों और प्रवेश द्वार पर की जा रही बारीक नक्काशी मंदिर को आकर्षक और ऐतिहासिक स्वरूप दे रही है। मंदिर का पूरा निर्माण लाल पत्थर (रेड सैंडस्टोन) से किया जा रहा है, जिसे कोटा के पास स्थित काशा गांव से मंगवाया गया है। निर्माण स्थल पर रोजाना 8 से 10 स्थानीय मजदूर और कारीगर कार्यरत हैं, जिनकी मेहनत से मंदिर तेजी से आकार ले रहा है।
लक्ष्मीनारायण व शिव परिवार होंगे विराजमान
निर्माण पूरा होने के बाद मंदिर में भगवान लक्ष्मीनारायण सपत्नीक विराजमान होंगे। साथ ही भगवान शिव अपने परिवार सहित स्थापित किए जाएंगे। ग्रामीणों को विश्वास है कि मंदिर के पूर्ण होने के बाद यहां नियमित पूजा-अर्चना, धार्मिक आयोजन और त्योहारों का आयोजन होगा, जिससे गांव का धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण और सुदृढ़ होगा।

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