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बीएपी के ‘भील कंट्री’ नक्शे पर बवाल, अलगाववादी एजेंडे के आरोप

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बीएपी के ‘भील कंट्री’ नक्शे पर बवाल, अलगाववादी एजेंडे के आरोप

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उदयपुर, 11 जनवरी : भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) द्वारा सोशल मीडिया पर कथित ‘भील कंट्री’ का नक्शा जारी किए जाने के बाद सियासी और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पहले अलग भील राज्य की मांग और अब अलग भील कंट्री का नक्शा सामने आने से इसे संविधान विरोधी, अलगाववादी और विघटनकारी विचारधारा करार दिया जा रहा है। मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है।
उदयपुर से भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए बीएपी और बीटीपी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारतीय आदिवासी पार्टी और भारतीय ट्राइबल पार्टी दोनों ही विघटनकारी एजेंडे पर काम कर रही हैं। इनके नेताओं के बयान और गतिविधियां स्थानीय आदिवासी समाज की सोच के विपरीत हैं और बाहरी, आयातित विचारधारा से प्रेरित प्रतीत होती हैं। उन्होंने कहा, बीएपी के नेता चर्च के इशारे पर यह कर रहे हैं, जो पहले के घटनाक्रम में साबित हो चुकी है। स्थानीय आदिवासियों को बरगलाने में लगे हैं, जबकि आदिवासी मूलत: सनातन है और भगवान शिव का पूजक है।
डॉ. रावत ने कहा कि कभी अलग धर्म कोड की मांग, कभी अलग राज्य और अब अलग देश जैसी अवधारणा सामने लाना सीधे-सीधे भारत की एकता और अखंडता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएपी नेता जिस दिशा में सोच रहे हैं, वह अंग्रेजी शासन की डिवाइड एंड रूल नीति की याद दिलाती है। अंग्रेजों का उद्देश्य हमेशा भारतीय समाज को बांटना रहा और उसी नीति के तहत 1896 में अंग्रेजों ने भील कंट्री का नक्शा तैयार किया था। आज उसी औपनिवेशिक सोच को बीएपी नेता दोहराते नजर आ रहे हैं।


आमजन में रोष, कार्रवाई की मांग
इस मुद्दे पर आम नागरिकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पंजाब केसरी से बातचीत में आमजन ने कहा कि अलग देश का नक्शा जारी करना और उसे राजनीतिक मुद्दा बनाना देशद्रोह की साजिश से कम नहीं है। लोगों का कहना है कि यह न केवल संविधान का अपमान है, बल्कि आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास भी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी संगठन या व्यक्ति इस तरह के विघटनकारी विचार फैलाने का साहस न कर सके। सोशल मीडिया पर भी इस नक्शे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कई लोगों का आरोप है कि भले ही विवाद बढ़ने के बाद नक्शा हटाने की बात कही जा रही हो, लेकिन यह अब भी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बीएपी सच में अपनी मंशा से पीछे हटी है या केवल दबाव में औपचारिक बयान दे रही है।
राष्ट्रीय एकता पर खतरे का सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के नक्शे और बयान केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि देश की एकता और संप्रभुता को कमजोर करने का माध्यम बन सकते हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों से अपेक्षा की जा रही है कि वे पूरे मामले को गंभीरता से लें और संविधान के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस मामले में बीएपी सांसद राजकुमार रोत से कई बार बात करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने मोबाइल नहीं उठाया।

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