चित्तौड़गढ़ जिला जेल में सामान के बदले 23 लाख का लेन-देन
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पैसे देने की पुष्टि, पाने वाला अज्ञात—फिर भी जेल स्टाफ को क्लीन चिट
चित्तौड़गढ़, 12 जनवरी: चित्तौड़गढ़ जिला जेल में बंदियों को निषिद्ध सामान उपलब्ध कराने से जुड़ा मामला जांच के बाद भी कई सवाल छोड़ गया है। विभागीय जांच में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि जनवरी 2022 से जनवरी 2023 के बीच बंदियों के परिजनों के बैंक खातों और यूपीआई आईडी के जरिए करीब 23 लाख रुपये का लेन-देन हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में पैसों के दिए जाने की पुष्टि हो गई, लेकिन यह रकम आखिर किसे मिली, इसका कोई ठोस और स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ सका। इसके बावजूद जेल प्रशासन और स्टाफ को जांच में क्लीन चिट दे दी गई, जिससे पूरी कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर महानिदेशालय कारागार, जयपुर के अधीक्षक दिनेश कुमार मीणा के निर्देश पर चित्तौड़गढ़ कोतवाली थाने में तीन बंदियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुरानी शिकायतों के बाद हुई जांच
चित्तौड़गढ़ जिला जेल में लंबे समय से यह शिकायतें मिलती रही हैं कि जेल के भीतर निषिद्ध सामग्री आसानी से पहुंच जाती है। आरोपों में विभागीय स्टाफ की मिलीभगत की बात भी सामने आती रही, जिनमें तत्कालीन डिप्टी जेलर अशोक पारीक सहित अन्य कर्मचारियों के नाम लिए गए। इन्हीं आरोपों के चलते मामले की विभागीय जांच करवाई गई।
पैसे का लेन-देन साबित, जिम्मेदारी तय नहीं
जांच केंद्रीय कारागृह उदयपुर के अधीक्षक द्वारा की गई। जांच में यह प्रमाणित हुआ कि बंदियों के परिजनों के खातों से यूपीआई और नकद के जरिए कई बार ट्रांजेक्शन हुए। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जेल स्टाफ की प्रत्यक्ष भूमिका प्रमाणित नहीं हो सकी, इसलिए उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। यहीं से सबसे बड़ा विरोधाभास सामने आया—जब लाखों रुपये का लेन-देन हुआ, तो वह रकम आखिर गई कहां?
चारदीवारी के ऊपर से सामग्री फेंकने का दावा
जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ बंदी जेल के बाहर से चारदीवारी के ऊपर से निषिद्ध सामग्री मंगवाते थे, जिसे अंदर पहुंचाया जाता था। शिकायत में बताए गए मोबाइल नंबरों पर पैसों का ट्रांजेक्शन भी प्राथमिक रूप से सही पाया गया।
यूपीआई और एटीएम ट्रांजेक्शन से खुले सुराग
बंदी लालूराम मीणा और रामचंद्र जाट से जुड़े खातों की जांच में सामने आया कि लालूराम मीणा के खाते से अधिकतर रकम एटीएम से निकाली गई, जबकि रामचंद्र जाट के खाते से पैसे अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर हुए। कुल 21 ट्रांजेक्शन में 23 लाख रुपये के लेन-देन की पुष्टि हुई।
तीन बंदियों पर एफआईआर, जांच जारी
जेल प्रशासन की रिपोर्ट पर मोहनलाल मीणा, मोहनलाल जाट और लालूराम मीणा के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि अब यह जांच की जाएगी कि पैसा किसे मिला और इसके पीछे कौन लोग थे। जेल स्टाफ को मिली क्लीन चिट के बावजूद मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है।
