पेपर लीक में नेताओं को बचाया, कटारा को बनाया बलि का बकरा: रोत
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बीएपी सांसद ने कांग्रेस-भाजपा के नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप, कहा—सब एक थैली के चट्टे-बट्टे
उदयपुर, 13 जनवरी : बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद और भारत आदिवासी पार्टी (बाप) के नेता राजकुमार रोत ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा को लेकर कांग्रेस और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक मामले में कटारा को जानबूझकर बलि का बकरा बनाया गया, जबकि इसमें कई बड़े नेताओं की संलिप्तता है, जिनके नाम अब तक सामने नहीं लाए गए।
मंगलवार को उदयपुर सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में रोत ने कहा कि कांकरी डूंगरी की घटना 24 सितंबर 2020 को हुई थी। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने 15 अक्टूबर 2020 को बाबूलाल कटारा को आरपीएससी सदस्य और वरिष्ठ नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया को मंत्री बनाया। यह पूरी तरह राजनीतिक फैसला था। कटारा का आरपीएससी सदस्य बनना जनजाति क्षेत्र के लिए गौरव की बात थी, लेकिन बाद में उनकी छवि जानबूझकर खराब की गई।
अनुशंसा करने वाले नेता क्यों चुप?
रोत ने कहा कि कटारा के नाम की अनुशंसा करने वालों में रघुवीर सिंह मीणा, दिनेश खोडनिया और अर्जुनलाल बामनिया शामिल थे। कटारा ने गिरफ्तारी के बाद ईडी और एसओजी पूछताछ में इन नामों का खुलासा किया है। अगर ये नेता निर्दोष हैं तो अब तक चुप क्यों हैं? अनुशंषा के बदले पैसा लेने वालों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। कटारा ने अपनी जान को खतरा बताया है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि खतरा किससे है।
मालवीया पर कार्रवाई क्यों नहीं?
रोत ने कहा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीया पर भी गंभीर आरोप लगे थे। कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन वे कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले गए और ‘वॉशिंग मशीन’ में धुलकर साफ हो गए। यदि वे दोबारा कांग्रेस में लौटते हैं तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। अगर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर भी सवाल उठेंगे।
कांग्रेस-भाजपा दोनों एक
रोत ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा की कोई वैचारिक लड़ाई नहीं है, दोनों ने सत्ता में रहकर आदिवासियों और बेरोजगार युवाओं का शोषण किया है। पेपर लीक गिरोह लंबे समय से सक्रिय है, जिसने आरक्षण और नौकरियां बेचने का काम किया।
सुप्रीम कोर्ट जाएगी बाप पार्टी
रोत ने अनुसूचित क्षेत्रों में पालिका व यूडीए के गठन को गलत बताते हुए कहा कि बलीचा में गरीब आदिवासियों के मकान तोड़े गए। हाईकोर्ट के फैसलों के बावजूद सरकार मैसा कानून पर कन्नी काट रही है। बाप पार्टी अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यूडीए क्षेत्र में भूमाफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत से जमीनें बेची गईं, लेकिन अब तक एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई।
