‘ऑफ सीजन फसलें उगाएं तो होगा ज्यादा फायदा’
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मत्स्य व पशुपालन भी अपनाने की सलाह, नर्सरी तैयार करने के बताए वैज्ञानिक तरीके
बांसवाड़ा, 20 जनवरी: किसानों की आय बढ़ाने और उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) के तहत बांसवाड़ा में दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। उद्यान विकास समिति के अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित यह सेमिनार जनजाति विकास विभाग के सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें जिलेभर से बड़ी संख्या में किसान और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए।
सेमिनार के मुख्य अतिथि और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष हकरू भाई मईड़ा ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि किसान संगठित होकर उत्पादन और विपणन करें तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सकता है।
कृषि अनुसंधान संस्थान के संभागीय निदेशक डॉ. हरगिलास मीणा ने जिले में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन की जानकारी देते हुए उन्नत किस्मों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। वहीं, पूर्व प्रधान बलवीर रावत ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों से ऑफ सीजन सब्जियां और फसलें उगाकर अधिक लाभ कमाने के तरीके बताए।
विदेशी अनुभवों से मिली नई दिशा
किसान कुरेश भाई ने डेनमार्क यात्रा के दौरान मिले अनुभवों को पीपीटी के माध्यम से साझा किया और पशुपालन व डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। पंकज बामनिया ने किसानों को खेती के साथ मत्स्य पालन और मशरूम उत्पादन अपनाने की सलाह देते हुए इसे अतिरिक्त आय का अच्छा साधन बताया।
वहीं, संघर्ष कटारा ने सब्जियों और फूलों की खेती के लिए उन्नत और वैज्ञानिक नर्सरी तैयार करने के तकनीकी तरीके किसानों को विस्तार से समझाए।
समस्याओं पर चर्चा, समाधान भी बताए
कार्यक्रम के दौरान भारतीय किसान संघ के रणछोड़ जी पाटीदार ने किसानों को फसलों के उचित दाम दिलाने के लिए मंडी व्यवस्था और समर्थन मूल्य की आवश्यकता पर जोर दिया। सहायक निदेशक उद्यान बदामीलाल निनामा ने उद्यानिकी फसलों की संभावनाओं के साथ-साथ किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कर उनके समाधान बताए। वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक (उद्यान) जितेंद्र सिंह बारोड़ ने उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं और अनुदान संबंधी जानकारी दी। इससे पूर्व उपनिदेशक उद्यान दलसिंह गरासिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। सेमिनार को किसानों के लिए नई तकनीकें सीखने और आय बढ़ाने का उपयोगी मंच बताया गया।
