पुलिस ने युवक के हाथ-पैर तोड़ झूठा फंसाया
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हाईकोर्ट ने कहा- जानवरों जैसा सुलूक; SHO को हटाने का आदेश
प्रतापगढ़, 22 जनवरी : प्रतापगढ़ में पुलिस की कथित बर्बरता का मामला राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच में पहुंच गया। आरोप है कि पुलिस ने अब्दुल हमीद शेख के घर में घुसकर परिवार के साथ मारपीट और लूटपाट की। युवक के हाथ-पैर तोड़ने के बाद उसे पुराने एनडीपीएस केस में फंसाने के लिए उसकी जेब में मोबाइल भी रख दिया गया।
31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 की रात की घटना के अनुसार, पुलिस अधिकारी और उनकी टीम ने शाकिर शेख के घर जबरन प्रवेश किया। उन्होंने याचिकाकर्ता के पिता अब्दुल हमीद शेख और अन्य व्यक्ति के साथ घातक हथियारों से मारपीट की और कीमती सामान लूट लिया। इसके बाद घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
याचिकाकर्ता के वकील रॉबिन सिंह ने बताया कि पुलिस ने अब्दुल हमीद को अपराधी साबित करने के लिए उसकी जेब में मोबाइल प्लांट किया। मोबाइल का कनेक्शन चार साल पुराने एनडीपीएस मामले से जोड़ा गया ताकि युवक को जेल भेजा जा सके।
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस फरजंद अली ने सुनवाई के दौरान घायल युवक की तस्वीरें देखकर इसे प्रथम दृष्टया “जानवरों जैसा सुलूक” और “कस्टोडियल टॉर्चर” करार दिया। कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से आरोपी थानाधिकारी एसएचओ दीपक बंजारा को पुलिस थाने से हटाने और ड्यूटी से दूर रखने के आदेश दिए।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 जनवरी के लिए तय की। साथ ही कोर्ट ने पांच कड़े निर्देश दिए हैं:
SHO को तुरंत हटाएं: आरोपी थानाधिकारी को किसी भी जांच या ड्यूटी से दूर रखा जाए।
CBI जांच पर जवाब तलब: एसपी को शपथ पत्र देना होगा कि क्यों न जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंप दी जाए।
सबूतों से छेड़छाड़ न हो: सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और केस डायरी सुरक्षित रहें; आरोपी अधिकारी केस डायरी या परिवादी से संपर्क नहीं करेगा।
एडिशनल SP पेश हों: अगली सुनवाई में केस डायरी लेकर कोर्ट में उपस्थित रहेंगे।
आईजी रेंज भी देखें: पुलिस अधिकारी के दंडनीय कृत्य की खुद जांच करें।
