ई-रेवेन्यू पोर्टल के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन तेज
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बिना सहमति लागू हुआ सिस्टम विवादों में, कलेक्टर से सरकार से संवाद की मांग
चित्तौड़गढ़, 22 जनवरी: जिला अभिभाषक संस्थान चित्तौड़गढ़ ने राजस्थान सरकार द्वारा लागू किए गए रेवेन्यू ई-पोर्टल मॉडर्नाइजेशन सिस्टम के विरोध में गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंडल अजमेर के अध्यक्ष के नाम जिला कलेक्टर से मांग की कि यह पोर्टल वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए। उनका कहना है कि दिसंबर 2024 में पोर्टल लॉन्च करने से पहले न तो प्रदेश के अधिवक्ताओं से राय ली गई और न ही किसी स्तर पर चर्चा हुई।
12 जनवरी 2025 के आदेश के बाद पूरे प्रदेश के उपखंड अधिकारी न्यायालय और राजस्व अपीलीय प्राधिकारी न्यायालयों में ई-फाइलिंग अनिवार्य कर दी गई। अधिवक्ताओं ने बताया कि इसके बाद व्यावहारिक समस्याएं बढ़ गई हैं, जिससे वकील और आम पक्षकार दोनों परेशान हैं। जिला अभिभाषक संस्थान का कहना है कि किसी भी डिजिटल व्यवस्था को लागू करने से पहले पर्याप्त तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षण होना आवश्यक है।
जिलाध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि राजस्व मामलों में आने वाले अधिकतर मामले गरीब काश्तकारों से जुड़े हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यदि सिस्टम बिना तैयारी के लागू होगा तो न्याय तक उनकी पहुंच और मुश्किल हो जाएगी। चित्तौड़गढ़ जिले में प्रतिदिन करीब 400-500 राजस्व मामले दर्ज होते हैं, इसलिए नई व्यवस्था लागू करने से पहले पूरी तैयारी आवश्यक है।
अधिवक्ताओं ने दो दिनों तक राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार किया, जिससे सुनवाई प्रभावित रही। संस्थान ने कलेक्टर से मांग की है कि राज्य सरकार पूरे राजस्थान में अधिवक्ता समुदाय से विचार-विमर्श करे, तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करे और आम काश्तकार की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम निर्णय ले, ताकि न्याय व्यवस्था सरल और सुलभ बनी रहे।
