डेढ़ साल बाद भी चालान पेश नहीं, समझौते के बावजूद केस वापसी अटकी
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बांसवाड़ा पावर प्लांट विवाद में न्याय की आस
बांसवाड़ा, 29 जनवरी: बांसवाड़ा पावर प्लांट को लेकर हुए आंदोलन और उससे जुड़े मुकदमों का मामला डेढ़ साल बाद भी अधर में लटका हुआ है। पावर प्लांट विवाद में नामजद 52 ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पुलिस अधीक्षक से मिला और लंबित चालान जल्द कोर्ट में पेश करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि चालान पेश नहीं होने के कारण राज्य सरकार स्तर पर केस वापस लेने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही, जिससे वे लंबे समय से मानसिक और आर्थिक तनाव झेल रहे हैं।
डेढ़ साल से कोर्ट-कचहरी के चक्कर
एसपी से मुलाकात के बाद हेमंत राणा ने बताया कि करीब 18 महीने पहले पावर प्लांट को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान महिलाओं सहित कई ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया और 52 लोगों को नामजद किया गया। इसके बाद से ही ग्रामीण न्याय की उम्मीद में भटक रहे हैं, लेकिन पुलिस की ओर से अब तक कोर्ट में चालान पेश नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री दौरे के दौरान हुआ था समझौता
ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांसवाड़ा दौरे के दौरान पावर प्लांट के उद्घाटन से पहले सांसद राजकुमार रोत और विधायक जयकृष्ण पटेल के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था। उस समय मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में यह सहमति बनी थी कि आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एसपी ने दिए जल्द चालान पेश करने के निर्देश
प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित थाना प्रभारी को तलब किया और निर्देश दिए कि मामले में शीघ्र चालान कोर्ट में पेश किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि चालान की प्रति मिलने के बाद वे राज्य सरकार को भेजकर पहले हुए समझौते के अनुसार केस विड्रॉल की प्रक्रिया पूरी करवाएंगे।
