रिश्वत के पंद्रह साल पुराने मामले में तत्कालीन बीईओ को एक साल की कैद
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उदयपुर, 30 जनवरी: विशिष्ठ न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), संख्या-2, उदयपुर की पीठासीन अधिकारी संदीप कौर ने शुक्रवार को सुनाए भ्रष्टाचार के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। जिसमें रिश्वत का आरोप साबित होने पर तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) समर्थ सिंह सांसी को पंद्रह साल पुराने मामले में एक साल के कारावास के साथ बीस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। मामला वर्ष 2011 का है, जिसमें उसे 2500 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था ।
विशिष्ट लोक अभियोजक हितेश गुप्ता ने बताया कि परिवादी हेमराज कुमावत, जो राजकीय प्राथमिक विद्यालय पोहपुरा (बेगूं) में ‘विद्यार्थी मित्र’ के पद पर कार्यरत था, ने एसीबी को शिकायत दी थी। परिवादी ने बताया कि उसे सेवा से हटा दिया गया था, लेकिन उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद उसे पुनः बहाल करने की एवज में तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी समर्थ सिंह सांसी ने 5000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। हालांकि 1000 रुपये अभियुक्त पहले ही ले चुका था और 2500 रुपये की और मांग कर रहा था। शिकायत के बाद एसीबी चित्तौड़गढ़ ने 8 फरवरी 2011 को आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार किया। परिवादी से ली रिश्वत राशि आरोपी एक अखबार के उपर रख दी थी।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने अभियुक्त समर्थ सिंह सांसी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 13(1)(डी) और 13(2) के तहत आरोप पत्र पेश किया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष 21 मौखिक गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 38 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट में भी अभियुक्त के हाथों और अखबार के धोवन में फिनोफ्थलीन पाउडर की उपस्थिति की पुष्टि हुई, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक प्रमाण था। दोनों ही धाराओं में अदालत ने एक—एक साल के कारावास के साथ दस—दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
