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शास्त्रीय कला की विभूतियों का होगा सम्मान

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शास्त्रीय कला की विभूतियों का होगा सम्मान

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‘ताम्बावती नगरी सम्मान’ से नवाजे जाएंगे सात कलाकार, 26-27 अप्रैल को उदयपुर में सजेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
उदयपुर, 20 अप्रैल:
झीलों की नगरी उदयपुर में आगामी 26 और 27 अप्रैल को आयोजित होने जा रहे छठे अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत महोत्सव 2026 में देशभर की शास्त्रीय नृत्य प्रतिभाओं का भव्य संगम देखने को मिलेगा। कथक आश्रम उदयपुर द्वारा ऑल इंडिया डांसर्स एसोसिएशन (आईडा) के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव में शास्त्रीय नृत्य की सात विशिष्ट विभूतियों को ‘ताम्बावती नगरी सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। उदयपुर के प्राचीन नाम ताम्बावती नगरी की स्मृति में इस सम्मान की शुरुआत की गई है।
महोत्सव का शुभारंभ पूर्व राजपरिवार सदस्य निवृत्ति कुमारी मेवाड़ के कर-कमलों द्वारा होगा। आयोजन के दौरान देश-विदेश के करीब 600 प्रतिभागी अपनी प्रस्तुतियों से मंच को सजीव बनाएंगे।
सम्मानित होने वाले कलाकारों में अमृत सिन्हा (लखनऊ), शरण्या बिष्ट (दिल्ली), राजश्री दास (बेंगलुरु), रिचा गुप्ता (दिल्ली), सृष्टि भसीन (जबलपुर), शिल्पा सिंह और सुमि अजय (बिलासपुर) शामिल हैं। ये कलाकार भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।
कथक आश्रम के सचिव चंद्रगुप्त सिंह चौहान ने बताया कि यह महोत्सव हिरण मगरी सेक्टर-4 स्थित अटल सभागार में आयोजित होगा। कार्यक्रम के लिए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ तथा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
महोत्सव के पहले दिन 26 अप्रैल को विनय तिवारी, शरण्या बिष्ट, सृष्टि भसीन और रिचा गुप्ता अपनी प्रस्तुतियां देंगे। साथ ही प्रियांशी एंड ग्रुप द्वारा शिव वंदना तथा कोपल शर्मा की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। दूसरे दिन 27 अप्रैल को रितेश बाबू, सुम्मी अजय, शिल्पा सिंह, अमृत सिन्हा और राजश्री दास मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा सेजल एंड ग्रुप द्वारा लोकनृत्य तथा निकुंज शेखर व अधिश्री सिंह द्वारा कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।
महोत्सव में दिल्ली के प्रतिष्ठित समूह द्वारा ‘उपकथक’ के माध्यम से कृष्ण लीला, रायपुर के कलाकारों द्वारा शिव तांडव, तथा केरल की पारंपरिक कथकली की प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रहेगी। दिन में नृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी, जबकि शाम का सत्र अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियों के नाम रहेगा। यह आयोजन न केवल शास्त्रीय नृत्य और संगीत की समृद्ध परंपराओं को मंच देगा, बल्कि उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई भी प्रदान करेगा।

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