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“ज्ञान, भक्ति, कर्म और अध्यात्म एकता से ही अवसाद मुक्त जीवन संभव” – कुलपति प्रो.सारंगदेवोत।

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“ज्ञान, भक्ति, कर्म और अध्यात्म एकता से ही अवसाद मुक्त जीवन संभव” – कुलपति प्रो.सारंगदेवोत।

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जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जयंती पर संगोष्ठी में अद्वैत वेदांत की समकालीन प्रासंगिकता पर मंथन
विद्या
उदयपुर, 22 अप्रैल
: जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जयंती के अवसर पर ” शंकराचार्य और अद्वैत वेदांत ” विषयक एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कुलपति सचिवालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम में विद्वानों ने शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर गहन विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान विद्यापीठ के कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर रहे, जबकि अध्यक्षता कुलपति प्रो.(कर्नल) शिव सिंह सारंगदेवोत ने की। मुख्य वक्ता लक्ष्मण पुरी गोस्वामी , विशिष्ट अतिथियों में ,प्रो. विमल शर्मा, संतोष राठौड़ आदि थे।
मुख्य वक्ता लक्ष्मणपुरी गोस्वामी ने अपने उद्बोधन में शास्त्रार्थ में विजय प्राप्त करने के पश्चात श्रृंगेरी मठ की स्थापना का प्रसंग सुनाते हुए चारों मठों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने मठों की शासन-प्रणाली का विस्तृत विवेचन करते हुए कहा कि शंकराचार्य को भारतवर्ष के प्रथम ‘जगद्गुरु’ के रूप में अलंकृत किया गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. (कर्नल) शिव सिंह सारंगदेवोत ने कहा कि शंकराचार्य ने भारत को एक सूत्र में पिरो कर अखंड भारत की अवधारणा को साकार किया। आज के समय में ज्ञान, भक्ति, कर्म एवं आध्यात्मिक एकता के माध्यम से अवसाद मुक्त जीवन जीने की अत्यंत आवश्यकता है।
संगोष्ठी में कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर ने कहा कि शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत केवल दार्शनिक चिंतन ही नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, समन्वित और सकारात्मक दिशा देने वाला मार्गदर्शन है।
अपने विचार रखते हुए प्रो. विमल शर्मा ने द्वैत एवं अद्वैत वेदांत के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारे शास्त्रों में चेतन एवं अवचेतन मस्तिष्क के माध्यम से ब्रह्मांड से असीम ऊर्जा प्राप्त करने के सहज मार्गों का वर्णन मिलता है। उन्होंने अद्वैत वेदांत को आंतरिक संतुलन और मानसिक शांति का आधार बताया।
कार्यक्रम के अंत में कवि श्रेणी दान चारण ने “मां” विषय पर अपनी भावपूर्ण कविता प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। संतोष राठौड़ ने शंकराचार्य के जीवन से जुड़े मधुकरी प्रसंग एवं माता के साथ उनके भावनात्मक दृष्टांत को विस्तार से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन व समापन आभार ज्ञापन डॉ कुलशेखर व्यास ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रो जीवन सिंह खरकवाल, डॉ.रमाकांत शर्मा, श्रीमती संध्या शर्मा रावल , श्रेणीदान चारण, डॉ ममता पानेरी, डॉ विमल शर्मा , संतोष राठौड़, डॉ हेमंत साहू, डॉ यज्ञ आमेटा सहित शोधार्थी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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