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कांठडी बांध से बह रहा हजारों लीटर पानी, सीपेज और विलायती बबूल से बढ़ा खतरा

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कांठडी बांध से बह रहा हजारों लीटर पानी, सीपेज और विलायती बबूल से बढ़ा खतरा

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ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग पर लापरवाही का लगाया आरोप, मानसून से पहले मरम्मत की मांग
डूंगरपुर, 7 मई:
डूंगरपुर जिले का कांठडी बांध इन दिनों सीपेज और अव्यवस्थाओं के कारण चिंता का विषय बना हुआ है। बांध की नहर की कोठी में लगातार हो रहे रिसाव से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है, जबकि दूसरी ओर बांध की पाल पर उगे बड़े-बड़े विलायती बबूल इसकी संरचना के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार कांठडी बांध की भराव क्षमता 8.50 मीटर है और यह पांच वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पिछली बारिश में ओवरफ्लो हुआ था। लेकिन अब नहर के गेट में खराबी और सीपेज के कारण पानी लगातार बह रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी सिंचाई और पशुओं के उपयोग में आने के बजाय बेकार नष्ट हो रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग ने मरम्मत कार्य के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई। नहर के मुख्य गेट की तकनीकी खराबी दूर करने के बजाय केवल दीवारों पर प्लास्टर कर काम पूरा मान लिया गया। इसके चलते गेट पूरी तरह बंद नहीं हो पा रहा और पानी का रिसाव जारी है।
विलायती बबूल से पाल को खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि बांध की पाल पर बड़े-बड़े विलायती बबूल उग आए हैं, जिनकी जड़ें पाल को अंदर से कमजोर कर रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन पेड़ों को नहीं हटाया गया तो आगामी मानसून में बांध की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि लगातार पानी बहने से गर्मी के दिनों में मवेशियों के लिए पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कई बार शिकायत देने के बावजूद समाधान नहीं होने पर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों ने मानसून शुरू होने से पहले गेट की मरम्मत और पाल की सफाई की मांग की है।

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