पिछोला स्थित जगमंदिर: कभी मुगल शहजादे खुर्रम और ब्रिटिश अधिकारियों का रहा संरक्षण स्थल
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डॉ. जी.एल. मेनारिया
उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील के मध्य स्थित जगमंदिर केवल एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मेवाड़ की उदारता, शरणागत वत्सलता और सांस्कृतिक संरक्षण का जीवंत प्रतीक भी रहा है। इतिहासकार डॉ. जी.एल. मेनारिया के अनुसार, यह स्थल अलग-अलग कालखंडों में मुगल शहजादे खुर्रम (बाद में शाहजहां) और 1857 की क्रांति के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों व उनके परिवारों के संरक्षण का केंद्र बना।
इतिहास के अनुसार वर्ष 1622 में जब मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल में उत्तराधिकार संघर्ष शुरू हुआ, तब शहजादे खुर्रम ने विद्रोह कर मेवाड़ के महाराणा कर्णसिंह से शरण मांगी। महाराणा ने पहले उन्हें देलवाड़ा की हवेली में सुरक्षित ठहराया और बाद में पिछोला झील के मध्य स्थित जगमंदिर में संरक्षण प्रदान किया। विदाई के समय महाराणा कर्णसिंह और खुर्रम के बीच मित्रता के प्रतीक स्वरूप पगड़ी बदलने की परंपरा निभाई गई। बताया जाता है कि खुर्रम की ऐतिहासिक पगड़ी आज भी संग्रहालय में सुरक्षित है।
इसके लगभग 235 वर्ष बाद, 1857 की क्रांति के दौरान भी जगमंदिर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय मेवाड़ के महाराणा स्वरूपसिंह ने ब्रिटिश अधिकारियों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा देते हुए जगमंदिर में शरण दी। तत्कालीन ब्रिटिश रेजिडेंट कैप्टन सी.एल. शावर्स ने अपनी पुस्तक “मिसिंग चैप्टर ऑफ इंडियन म्यूटिनी” में मेवाड़ के महाराणा की उदारता और संरक्षण का विस्तृत वर्णन किया है। इतिहासकारों के अनुसार जगमंदिर मेवाड़ की सहिष्णुता, कूटनीतिक संबंधों और सनातन संस्कृति की संरक्षण भावना का ऐतिहासिक प्रतीक है।
