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प्रकृति के संरक्षण के बिना विकास अधूरा : कर्नल प्रो. सारंगदेवोत

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प्रकृति के संरक्षण के बिना विकास अधूरा : कर्नल प्रो. सारंगदेवोत

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जैव विविधता संरक्षण एवं सतत विकास पर विद्यापीठ में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
उदयपुर, 19 मई:
जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ में “जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास में इसकी भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल एवं गरिमामयी समापन हुआ। 18 एवं 19 मई 2026 को आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं पर्यावरण विशेषज्ञों ने भाग लेकर वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास की रणनीतियों पर गंभीर मंथन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यापीठ के कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर रहे।
सम्मेलन की अध्यक्षता कुलपति मानद कर्नल प्रो शिव सिंह सारंगदेवोत ने दीप प्रज्वलन कर की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति तभी सार्थक है जब वह प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखते हुए हो। उन्होंने कहा कि सतत विकास का मूल आधार प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। इस अवसर पर प्रोफेसर मंजू मांडोत भी मंचासीन रहीं।
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि प्रो विमल शर्मा ने तकनीकी सत्र में जैव विविधता के निरंतर हो रहे ह्रास से वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं कृषि व्यवस्था पर उत्पन्न हो रहे संकटों के वैज्ञानिक तथ्यों को प्रस्तुत किया।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर संगीता राठौड़ ने जलवायु परिवर्तन के दौर में स्थानीय जैव विविधता संरक्षण के व्यावहारिक उपायों एवं वैश्विक पर्यावरण नीतियों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
संस्थान की निदेशक डॉ. सपना श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों को रेखांकित किया तथा कहा कि ऐसे आयोजन शोध एवं पर्यावरणीय जागरूकता को नई दिशा प्रदान करते हैं। आयोजन सचिव डॉ. पूजा जोशी ने दो दिवसीय कार्यक्रम के विभिन्न तकनीकी सत्रों का सफल संचालन एवं समन्वय करते हुए पधारे अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन में विशिष्ट आमंत्रित वक्ताओं के रूप में डॉ. पल्लवी सक्सेना (रूस) डॉ. प्रीतम जोशी, डॉ. मनोज जोशी, एवं डॉ. विजय सहित अनेक विशेषज्ञों ने अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए।
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को सफल बनाने में विश्वविद्यालय की कोर से डॉ. जय सिंह जोधा, डॉ. मंगल श्री दूलावत, डॉ. उत्तम प्रकाश शर्मा, डॉ. योगिता श्रीमाली, डॉ. भावेश जोशी, डॉ. खुशबू जैन, डॉ. लोकेश सुथार, डॉ. लालिमा शर्मा, डॉ. शक्तिका चौधरी, समर फतेह सिंह, डॉ. हिमानी वर्मा, महेंद्र कुमार मीणा रुपेश जूनीवाल , प्रमोद पुरोहित एवं विक्रम सिंह सरदार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामयी मंच संचालन डॉ. सिद्धिमाँ शर्मा ने किया।

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