धर्मांतरण नेटवर्क की पड़ताल में चौंकाने वाले दावे, 50 गांवों में 10 साल से चल रहा नेटवर्क
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लालच, प्रार्थना सभा और दबाव के जरिए आदिवासी परिवारों को बनाया जा रहा था निशाना
उदयपुर, 8 जून: उदयपुर जिले के ऋषभदेव क्षेत्र में कथित धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर हुए खुलासे ने आदिवासी अंचल में हलचल मचा दी है। पुलिस कार्रवाई और स्थानीय लोगों के आरोपों के बाद सामने आए तथ्यों से संकेत मिले हैं कि खेरवाड़ा-ऋषभदेव क्षेत्र के दर्जनों गांवों में वर्षों से प्रार्थना सभाओं, आर्थिक प्रलोभनों और कथित दबाव के माध्यम से आदिवासी परिवारों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा था।
क्षेत्र के कानूवाड़ा बिलखाई, कागदर और आसपास के ग्रामीणों का दावा है कि बाहरी राज्यों से आने वाले पादरी और मिशनरी समूह क्षेत्र में पिछले दस साल से सक्रिय है। ये लोग पहले बीमारियों के उपचार, आर्थिक सहायता तथा सामाजिक सहयोग का भरोसा देकर लोगों को अपने संपर्क में लेते थे। बाद में उन्हें नियमित प्रार्थना सभाओं से जोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता था।
‘सभा में नहीं पहुंचे तो धमकाया जाता था’
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों की मदद से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशाना बनाया जाता था। कई लोगों ने दावा किया कि प्रार्थना सभाओं में शामिल होने के बाद अनुपस्थित रहने वालों पर दबाव बनाया जाता था। महिलाओं को विशेष रूप से जोड़ने के प्रयास किए जाते थे और कुएं, ट्यूबवेल, आर्थिक सहायता तथा बीमारी ठीक करने जैसे वादे किए जाते थे।
शिकायत के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
6 जून को मिली शिकायत के आधार पर ऋषभदेव थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 पादरियों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार जांच में धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन और दबाव दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
‘अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका’
उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने मामले को गंभीर बताते हुए इसे सुनियोजित और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा मामला बताया है। वहीं पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
