आरजीएचएस में ओपीडी कैशलेस सुविधा पर बढ़ी चिंता
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डॉक्टर संगठन बोला- मूल भावना से न हो समझौता
सबसे बड़ा बदलाव: आधार से होगी पहचान, पूरे सिस्टम का होगा पुनर्गठन
उदयपुर, 8 जून: राजस्थान सरकार ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। योजना को अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) के तहत संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही RGHS और आयुष्मान भारत योजना के एकीकरण, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने जैसे कदमों से पूरी व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन होने जा रहा है।
सरकारी स्तर पर तैयार किए जा रहे नए ढांचे के तहत लाभार्थियों की पहचान आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से होगी। कैशलेस इलाज के लिए आधार प्रमुख पहचान माध्यम बनेगा, जिससे फर्जी क्लेम, डुप्लीकेट लाभ और अन्य गड़बड़ियों पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी। RGHS कार्यालयों, स्टाफ संरचना और तकनीकी व्यवस्थाओं का भी पुनर्गठन प्रस्तावित है। सरकार का लक्ष्य योजना को अधिक पारदर्शी, हाईटेक और जवाबदेह बनाना है।
ओपीडी कैशलेस सेवा बनी बहस का केंद्र
इसी बीच प्रस्तावित बदलावों को लेकर कर्मचारी और चिकित्सक संगठनों में चर्चा तेज हो गई है। ऑल राजस्थान इन सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (अरिस्दा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने कहा कि योजना में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार चाहे जितने सुरक्षा प्रावधान लागू करे, उनका स्वागत है, लेकिन ओपीडी कैशलेस सुविधा किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल लंबे समय से ओपीडी कैशलेस व्यवस्था का विरोध करते रहे हैं, जबकि आम राज्यकर्मियों और उनके परिवारों को सबसे अधिक राहत इसी सुविधा से मिलती है। ऐसे में सुधारों के नाम पर योजना की मूल भावना प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग
डॉ. चौधरी ने यह भी कहा कि यदि योजना के संचालन में कोई सरकारी चिकित्सक, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल और कठोर विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि आरजीएचएस लाखों राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स की स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी योजना है और इसके दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
