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महाराणा प्रताप टूरिज्म सर्किट: मेवाड़ की वीरता और गौरव को वैश्विक पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम

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महाराणा प्रताप टूरिज्म सर्किट: मेवाड़ की वीरता और गौरव को वैश्विक पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी सोच से साकार हो रहा ऐतिहासिक पर्यटन प्रोजेक्ट
डीपीआर का अनुमोदन, वित्तीय स्वीकृति भी जारी
उदयपुर।
राजस्थान की धरती वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की गाथाओं से ओतप्रोत है। इनमें महाराणा प्रताप का नाम भारतीय इतिहास में अदम्य साहस और राष्ट्र गौरव के प्रतीक के रूप में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान सांस्कृतिक विरासतों और गौरवमयी थातियों को सहेजते हुए विकास के डग भर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना में संस्कृति और विरासतों को उच्च स्थान दिया गया है। राजस्थान सरकार भी इसी संकल्पना को षिरोधार्य कर आगे बढ़ रही है। इसका प्रमुख उदाहरण राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट है। इसका उद्देश्य मेवाड़ के महान योद्धा वीरशिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन और बलिदान से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर लाना और युवा पीढ़ी को अपनी विरासतों पर गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान कराना है। यह सर्किट न केवल पर्यटकों को महाराणा प्रताप की वीरता और देशभक्ति से परिचित कराएगा, बल्कि मेवाड़ के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को भी उजागर करेगा।
जल्द धरातल पर साकार होगी परियोजना
राज्य सरकार ने महाराणा प्रताप टूरिज्म सर्किट को अधिक से अधिक प्रांसगिक और पीढ़ियों के लिए उपयोगी बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए। इसके लिए प्रस्तावित टूरिज्म सर्किट के दायरे में आने वाले स्थलों, उनसे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों के संबंध में विशेषज्ञों के साथ विचार-मंथन के साथ ही जनभावनाओं आदि का सघन परीक्षण कराया गया। राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के माध्यम से प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई। करीब 100 करोड़ से भी अधिक की इस परियोजना का अनुमोदन भी हो चुका है तथा वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है।
विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास का संगम
महाराणा प्रताप टूरिज्म सर्किट के माध्यम से हल्दीघाटी, दिवेर, गोगुन्दा एवं चावंड सहित महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण ही नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक पर्यटन अनुभवों से जोड़ना भी है। इस सर्किट के विकसित होने से पर्यटकों को महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष, रणनीति और मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक जीवन शैली को भी नया मंच प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी से कराया जाएगा कार्य
राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत ने बताया कि परियोजना को विश्वस्तरीय स्वरूप देने के लिए राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर की अनुभवी और प्रतिष्ठित एजेंसी के माध्यम से कार्य कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे परियोजना के डिज़ाइन, प्रस्तुतीकरण, पर्यटन सुविधाओं और विरासत संरक्षण के कार्यों में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। आगामी एक-दो सप्ताह में इस पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है तथा उसके तुरंत बाद परियोजना को धरातल पर साकार करने के लिए कदम बढ़ाए जाएंगे।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
महाराणा प्रताप टूरिज्म सर्किट के विकास से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, गाइड सेवा, लोक कला एवं अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री की पर्यटन विकास के प्रति प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश में पर्यटन को आर्थिक विकास का सशक्त माध्यम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी पहल पर प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। महाराणा प्रताप टूरिज्म सर्किट इसी सोच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो आने वाले समय में मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महाराणा प्रताप टूरिज्म सर्किट न केवल वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के अद्वितीय योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा, बल्कि राजस्थान की समृद्ध विरासत, संस्कृति और पर्यटन क्षमता को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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