महाराणा प्रताप जयंती पर गायब मिली प्रतिमा, गोगुंदा में उठे सवाल
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गोगुंदा (उदयपुर), 18 जून: मेवाड़ की ऐतिहासिक और गौरवशाली धरती गोगुंदा में महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जहां पूरे क्षेत्र में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम से मनाई गई, वहीं गोगुंदा की राजस्थली पर स्थापित महाराणा प्रताप की प्रतिमा ही गायब मिली। सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न मंचों पर महाराणा प्रताप के शौर्य और बलिदान की गाथाएं गूंजीं, लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि प्रतिमा आखिर कहां है।
जानकारी के अनुसार राजस्थली परिसर में भीलू राणा की प्रतिमा के साथ वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी। इसके लिए करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी और परिसर को ऐतिहासिक स्वरूप देने का प्रयास किया गया था। लेकिन महाराणा प्रताप जयंती के दिन मौके पर केवल भीलू राणा की प्रतिमा ही दिखाई दी, जबकि महाराणा प्रताप की प्रतिमा वहां नहीं थी।
मामले की पड़ताल में सामने आया कि महाराणा प्रताप की प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई थी। प्रतिमा की मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए संबंधित समिति ने उसे जयंती से एक दिन पूर्व हटवा दिया था। हालांकि प्रतिमा हटाने की सूचना सार्वजनिक नहीं होने से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रही।
जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रतिमा का अनुपस्थित होना चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत कार्य आवश्यक था तो प्रशासन और समिति को इसकी पूर्व सूचना जारी करनी चाहिए थी, ताकि महाराणा प्रताप की जयंती पर इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती। अब लोगों की नजर प्रतिमा की शीघ्र पुनर्स्थापना पर टिकी हुई है।
