चित्तौड़गढ़ दुर्ग में सिर्फ अवैध व्यावसायिक निर्माणों पर चलेगा बुलडोजर
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प्रशासन ने पुश्तैनी मकानों को राहत दी, लोगों ने ASI की भूमिका पर उठाए सवाल
चित्तौड़गढ़, 26 जून: विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर प्रस्तावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई केवल नियमों के विरुद्ध बने व्यावसायिक निर्माणों पर होगी, जबकि वर्षों से रह रहे परिवारों के पुश्तैनी मकानों में सामान्य मरम्मत या छोटे बदलाव के आधार पर कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। इसके बावजूद दुर्गवासियों में नाराजगी बनी हुई है और उन्होंने पुरातत्व विभाग (एएसआई) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
दुर्ग निवासियों का कहना है कि यदि निर्माण अवैध थे तो उन्हें वर्षों तक बनने क्यों दिया गया। उनका दावा है कि वर्ष 2004 में भी कई निर्माण चिन्हित किए गए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पिछले पांच वर्षों में भी लगातार निर्माण होते रहे। नोटिस जारी हुए, मगर निर्माण कार्य नहीं रुका। लोगों का आरोप है कि समय रहते सख्ती बरती जाती तो आज इतनी बड़ी कार्रवाई की नौबत नहीं आती।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण सामग्री दुर्ग तक पहुंचने के दौरान एएसआई के सुरक्षा कर्मियों ने कभी प्रभावी रोक नहीं लगाई। ट्रैक्टरों की औपचारिक वीडियोग्राफी के बाद सामग्री ऊपर जाने दी जाती रही। ऐसे में अब अचानक कार्रवाई से लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
दुर्ग निवासी त्रिलोक सालवी का कहना है कि यहां रहने वाले परिवार पीढ़ियों से किले में बसे हैं और उन्हें अतिक्रमणकारी नहीं कहा जा सकता। उनका कहना है कि पुराने मकानों की छतें जर्जर हो चुकी हैं और बरसात में पानी टपकता है, लेकिन मरम्मत के लिए भी अनुमति नहीं मिलती। उन्होंने मांग की कि जहां स्थायी आबादी है, वहां कम से कम मकानों के रखरखाव और मरम्मत की स्पष्ट अनुमति दी जानी चाहिए। अब लोगों की नजर प्रशासन और एएसआई की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
