जन्म से अंधे पिंटू की जिंदगी अब भी सरकारी मदद की राह में
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अनदेखी: 14 वर्षों से योजनाओं के लिए भटक रहा दिव्यांग, न पेंशन मिली, न बीपीएल कार्ड; पत्नी मजदूरी कर पाल रही परिवार
सलूंबर, 1 जुलाई (संगीता कलाल): सरकारें भले ही दिव्यांगों और जरूरतमंदों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दावे करती हों, लेकिन जयसमंद क्षेत्र की ओड़ा ग्राम पंचायत के डाक पलटा घाटी फलां निवासी 32 वर्षीय जन्मजात दृष्टिबाधित पिंटू मीणा की कहानी इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दोनों आंखों से जन्म से ही अंधे पिंटू पिछले 14 वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें दिव्यांग पेंशन, बीपीएल कार्ड, प्रधानमंत्री आवास, खाद्य सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। आर्थिक तंगी के बीच उनकी पत्नी कांता मीणा मजदूरी, पशुपालन और छोटी खेती कर किसी तरह पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।
पिंटू मीणा के परिवार में पत्नी कांता तथा दो पुत्र—आठ वर्षीय नीतेश और छह वर्षीय कमलेश हैं। पूरा परिवार एक जर्जर कच्चे केलुपोश मकान में रहने को मजबूर है। जन्मजात दिव्यांग होने के कारण पिंटू किसी प्रकार का रोजगार नहीं कर सकते। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी पर है। मजदूरी नहीं मिलने या बीमारी की स्थिति में परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का भी संकट खड़ा हो जाता है।
पिंटू का कहना है कि उन्होंने वर्षों से संबंधित विभागों और अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। एपीएल राशन कार्ड होने के कारण वे दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना, खाद्य सुरक्षा, शौचालय और कुटीर ज्योति जैसी योजनाओं से भी वंचित हैं। समाजसेवी प्रताप सिंह मीणा ने प्रशासन से परिवार का तत्काल सर्वे कर सभी पात्र योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है।
पिंटू मीणा ने जिला कलेक्टर से भावुक अपील करते हुए कहा है कि उनकी वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कर उन्हें बीपीएल श्रेणी में शामिल किया जाए तथा सभी पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जन्म से दृष्टिबाधित व्यक्ति भी वर्षों तक योजनाओं से वंचित रहे, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
