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खनन विभाग पर विधायक का बड़ा हमला: ‘माफियाओं को संरक्षण, गरीबों पर कार्रवाई’

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खनन विभाग पर विधायक का बड़ा हमला: ‘माफियाओं को संरक्षण, गरीबों पर कार्रवाई’

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चौरासी विधायक अनिल कटारा ने लगाया मिलीभगत का आरोप, विभाग ने कहा— सभी आरोप निराधार, जांच को तैयार
जुगल कलाल
डूंगरपुर, 6 जुलाई:
डूंगरपुर जिले में क्वार्ट्ज पत्थर के कथित अवैध खनन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव तेज हो गया है। भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के चौरासी विधायक अनिल कटारा ने खनन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर खनन माफियाओं से मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि गरीब आदिवासियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही और बड़े खनन माफियाओं पर शिकंजा नहीं कसा गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सोमवार को विधायक कटारा अचानक अपनी टीम के साथ खनन विभाग कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अवैध खनन से संबंधित रिकॉर्ड और कार्रवाई का ब्यौरा मांगा, लेकिन तत्काल जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इस पर विधायक ने विभाग के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एक जनप्रतिनिधि को जानकारी नहीं मिल रही है तो आम जनता की सुनवाई की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
‘बड़े माफिया सुरक्षित, गरीब आदिवासी निशाने पर’
विधायक ने आरोप लगाया कि विभाग बड़े खनन माफियाओं को संरक्षण दे रहा है, जो आदिवासी क्षेत्रों की पहाड़ियों में खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं। वहीं, अपने घर की मरम्मत या खेत की मेड़बंदी के लिए कुछ पत्थर ले जाने वाले गरीब आदिवासियों पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। उन्होंने इसे विभाग का दोहरा मापदंड बताया।
फोरमैन पर भी लगाए गंभीर आरोप
अनिल कटारा ने विभाग की फोरमैन मीनाक्षी व्यास का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने बॉडीगामा क्षेत्र में खनन माफियाओं के साथ सांठगांठ की। विधायक का दावा है कि उन्होंने इस दौरान 10 से 12 बार फोन किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि यदि विभाग का रवैया नहीं बदला तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
विभाग का जवाब— ऑपरेटर नहीं था, रिकॉर्ड जल्द देंगे
माइनिंग इंजीनियर घनश्याम सिंह चौहान ने विधायक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें जानकारी देने से इनकार नहीं किया गया था। संयोगवश कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण मांगा गया डेटा तत्काल नहीं निकाला जा सका। उन्होंने आश्वासन दिया कि रिकॉर्ड शीघ्र उपलब्ध करा दिया जाएगा। साथ ही कहा कि मिलीभगत या फोन नहीं उठाने जैसे आरोप निराधार हैं, फिर भी यदि कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्वार्ट्ज के अवैध कारोबार पर फिर उठे सवाल
डूंगरपुर के सागवाड़ा, साबला और आसपुर क्षेत्र लंबे समय से क्वार्ट्ज पत्थर के अवैध खनन को लेकर चर्चा में रहे हैं। आरोप है कि अवैध रूप से निकाले गए पत्थर को फर्जी ई-रवाना के जरिए वैध दिखाकर बाजारों तक पहुंचाया जाता है। हाल ही में पुलिस और प्रशासन ने फर्जी ई-रवाना से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा भी किया था। हालांकि, वर्तमान मामले में विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और मामले की जांच की प्रतीक्षा है।

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