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30 साल बाद उबेश्वर में दिखा दुर्लभ लौडांकिया वाइन स्नेक

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30 साल बाद उबेश्वर में दिखा दुर्लभ लौडांकिया वाइन स्नेक

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अरावली की जैव विविधता का अनूठा संकेत, 30 साल पहले फुलवारी की नाल में हुआ था रिकॉर्ड
उदयपुर, 13 जुलाई:
उदयपुर के उबेश्वर क्षेत्र में दुर्लभ सर्प प्रजाति लौडांकिया वाइन स्नेक (अहेतुल्ला) दिखाई देने से वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों में उत्साह है। इस दुर्लभ सांप को 12 जुलाई को वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर रोहित द्विवेदी ने शरद अग्रवाल और दीपाल कालरा के साथ कैमरे में कैद किया। विशेष बात यह है कि करीब 30 वर्ष पहले भी इस प्रजाति को उदयपुर क्षेत्र में ही देखा गया था।
रिटायर्ड वन अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने लगभग तीन दशक पहले इस सांप को फुलवारी की नाल में देखा और रिकॉर्ड किया था। उस दौरान माउंट आबू और कुंभलगढ़ क्षेत्र में भी इसके दर्शन हुए थे। उन्होंने बताया कि यह सर्प अत्यंत दुर्लभ, तेज गति से चलने वाला और अधिकतर पेड़ों पर रहने वाला होता है।
बेल जैसी आकृति, कम विषैला और शांत स्वभाव
लौडांकिया वाइन स्नेक अपने पतले, लंबे और बेल जैसी आकृति वाले शरीर के कारण आसानी से पहचाना जाता है। इसका रंग सामान्यतः चेस्टनट ब्राउन होता है, जिस पर काले धब्बे और सिर के नीचे हल्के सफेद पैच दिखाई देते हैं। इसकी लंबी नुकीली थूथन, बड़ी आंखें और क्षैतिज पुतलियां इसे अन्य सर्पों से अलग बनाती हैं। यह दिन में सक्रिय रहता है और छोटे कीड़े, छिपकलियां तथा पक्षियों के अंडे इसका मुख्य आहार हैं। कम विषैला होने के कारण इसे सामान्य परिस्थितियों में मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता।
रोहित द्विवेदी ने कहा कि उबेश्वर क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रजाति का मिलना अरावली की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है और इसका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण संरक्षण प्रयासों को नई दिशा देगा।

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