आधुनिक राजस्थानी काव्य में शांति और अहिंसा पर व्याख्यान आयोजित
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उदयपुर, 16 जुलाई: राजस्थानी विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा “आधुनिक राजस्थानी काव्य में शांति और अहिंसा” विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश सालवी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय-प्रवर्तन से किया। उन्होंने आधुनिक राजस्थानी काव्य में शांति और अहिंसा की परंपरा तथा उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं सह-अधिष्ठाता नवीन नंदवाना ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य सदैव शांति, सह-अस्तित्व और अहिंसा का संदेश देता आया है। उन्होंने विभिन्न साहित्यिक कृतियों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि साहित्य समाज में मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है।मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास, निदेशक, राजस्थानी भाषा एवं साहित्य विभाग, जैन विश्वभारती, लाडनूं ने अपने व्याख्यान में आधुनिक राजस्थानी साहित्य में निहित शांति और अहिंसा के स्वर को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने अनेक राजस्थानी कवियों की कविताओं और रचनाओं के उदाहरणों के माध्यम से विषय का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को राजस्थानी काव्य की मानवीय चेतना से परिचित कराया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कला महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज में शांति, सद्भाव और अहिंसा की भावना को सशक्त बनाने का कार्य करता है तथा वर्तमान समय में ऐसे विमर्शों की आवश्यकता और भी बढ़ गई है, उन्होंने अपनी बातों में कई संस्कृत पदों के माध्यम से विषय को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. प्रतिभा, प्रो. सुधा चौधरी, डॉ. ज्योतिबाबू जैन, डॉ. सुमत कुमार जैन, डॉ. राजु सिंह, डॉ. सुमित्रा शर्मा, डॉ. दीपा सोनी, डॉ. संगीता अठवाल, डॉ. खुशपाल गर्ग, डॉ. तरुण कुमार शर्मा, डॉ. मुरलीधर पालीवाल, डॉ. शाहीद परवेज़, डॉ. रेखा जैन, डॉ. रेखा बडाला, डॉ. दर्शना जैन, डॉ. अनिल गारु, डॉ. गजेन्द्रसिंह राव,डॉ तरन्नुम मंसूरी, जेठानंद पंवार, युधिष्ठिर व्यास,डाली मेघवाल, दिनेश गुर्जर सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
