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सिजेरियन ऑपरेशन में महिला के पेट में छूटा मोप, दो महीने बाद अहमदाबाद में निकाला

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सिजेरियन ऑपरेशन में महिला के पेट में छूटा मोप, दो महीने बाद अहमदाबाद में निकाला

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गंभीर संक्रमण से बिगड़ी हालत, 15 लाख खर्च; कलेक्टर ने मेडिकल जांच के दिए आदेश
उदयपुर, 17 जुलाई:
राजस्थान में चित्तौड़गढ़ के एक निजी अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। महिला के पति ने आरोप लगाया है कि ऑपरेशन के दौरान मेडिकल टीम पेट के अंदर इस्तेमाल किया गया कॉटन का मोप (सर्जिकल कपड़ा) छोड़ गई, जिससे महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई। करीब दो माह तक इलाज कराने के बाद अहमदाबाद के एक अस्पताल में सर्जरी कर मोप बाहर निकाला गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर डॉ. मंजू और एसपी धर्मेंद्र सिंह ने मेडिकल टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
परिजनों के अनुसार कुंभानगर स्थित दक्ष हॉस्पिटल में 2 मई को जया चौधरी का सिजेरियन ऑपरेशन हुआ, जिसमें बेटे का जन्म हुआ। 6 मई को अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ दिनों बाद महिला को तेज पेट दर्द, बुखार और लगातार संक्रमण की शिकायत शुरू हो गई। स्थानीय स्तर पर उपचार के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में अहमदाबाद के जायडस अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने महिला के पेट में ऑपरेशन के दौरान छोड़ा गया मोप होने की पुष्टि की। 27 जून को सर्जरी कर उसे बाहर निकाला गया तथा बड़ी आंत सहित अन्य प्रभावित अंगों का उपचार किया गया।
परिवार का आरोप है कि इस लापरवाही के कारण महिला के शरीर में गंभीर संक्रमण फैल गया, बड़ी आंत प्रभावित हुई तथा लीवर और तिल्ली पर भी असर पड़ा। अब तक इलाज पर करीब 15 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और लंबे समय तक भर्ती रहने से नवजात शिशु को मां का दूध भी नहीं मिल सका।
जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए मेडिकल टीम गठित की है। जांच में ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में डॉक्टरों या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की मुख्य बातें
2 मई: निजी अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन, बेटे का जन्म।
ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में कथित रूप से सर्जिकल मोप छूट गया।
27 जून: अहमदाबाद के अस्पताल में सर्जरी कर मोप निकाला गया।
करीब 15 लाख रुपये इलाज पर खर्च होने का परिजनों का दावा।
जिला कलेक्टर ने मेडिकल जांच के आदेश दिए, लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई होगी।

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