यूएन मंच पर गूंजा आदिवासी अधिकारों का मुद्दा, सांसद राजकुमार रोत ने रखी 14 करोड़ लोगों की आवाज
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जिनेवा में EMRIP सम्मेलन में बोले—705 अनुसूचित जनजातियां ही भारत की मूल निवासी; भाषण के बाद शुरू हुई राजनीतिक बहस
उदयपुर, 20 जुलाई : डूंगरपुर-बांसवाड़ा से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के आदिवासी अधिकारों से जुड़े मंच EMRIP में आदिवासी समुदाय के अधिकार, पहचान और संवैधानिक संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनके संबोधन के बाद राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई।
रोत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की 705 अनुसूचित जनजातियां ही देश की वास्तविक ‘इंडिजिनस पीपुल्स’ (मूल निवासी) हैं। उन्होंने कहा कि देश के लगभग 14 करोड़ आदिवासियों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, भाषा और संवैधानिक अधिकारों को वैश्विक स्तर पर भी उचित मान्यता मिलनी चाहिए।
उन्होंने जल, जंगल, जमीन, वनाधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और विस्थापन जैसे मुद्दों पर आदिवासी समाज की चिंताओं को रखते हुए अधिकारों की बेहतर सुरक्षा की मांग की। अपने तर्क के समर्थन में उन्होंने कैलास बनाम महाराष्ट्र राज्य (2011) के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी उल्लेख किया। भाषण के बाद राजस्थान भाजपा ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने पर आपत्ति जताई, जबकि रोत ने कहा कि उन्होंने करोड़ों आदिवासियों की आवाज़ को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
