उदयपुर में तेजी से सिमट रही खेती की जमीन, बीस साल में बढ़ा शहरी विस्तार
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रियल एस्टेट, पर्यटन और शहरीकरण की दौड़ में खेत हो रहे कम, भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर भी उठने लगे सवाल
उदयपुर, 27 जुलाई (सुभाष शर्मा): झीलों की नगरी उदयपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन के लिए विश्वभर में पहचान बना चुका है, लेकिन इसी विकास की रफ्तार अब आसपास की कृषि भूमि पर भारी पड़ रही है। पिछले दो दशक में शहर का दायरा तेजी से बढ़ा है। शहर से लगे कई गांवों में जहां कभी गेहूं, मक्का, सोयाबीन, चना और सब्जियों की लहलहाती फसलें दिखाई देती थीं, वहां आज टाउनशिप, होटल, रिसॉर्ट, फार्म हाउस, लग्जरी विला और व्यावसायिक परियोजनाएं खड़ी हो चुकी हैं।
शहरी नियोजन और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन यदि उपजाऊ कृषि भूमि का अनियंत्रित भूमि उपयोग परिवर्तन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में उदयपुर के आसपास खेती योग्य भूमि तेजी से घटेगी। इसके परिणामस्वरूप पर्यावरणीय असंतुलन, भूजल संकट और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. सुबोध कुमार शर्मा का कहना है कि भूमि उपयोग में यह बदलाव केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कृषि, पर्यावरण और भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ने लगा है।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बदली तस्वीर
शहर से सटे भुवाणा, सुखेर, बेदला, अंबेरी, बलीचा, देबारी, डबोक, एकलिंगपुरा, नाई और उबेश्वर रोड जैसे क्षेत्रों में कृषि भूमि का सबसे अधिक गैर-कृषि उपयोग हुआ है। इन इलाकों में पहले बड़ी मात्रा में खेती होती थी, लेकिन अब यहां तेजी से आवासीय कॉलोनियां, होटल, रिसॉर्ट और फार्म हाउस विकसित हो रहे हैं।
क्यों घट रही है खेती की जमीन?
शहर का लगातार बढ़ता विस्तार।
पर्यटन उद्योग के कारण होटल और रिसॉर्ट की मांग।
फार्म हाउस, लग्जरी विला और निजी टाउनशिप का विकास।
बाईपास, फोरलेन और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाएं।
किसानों को जमीन बेचने पर खेती से कई गुना अधिक आर्थिक लाभ।
भूजल स्तर में गिरावट, बढ़ती लागत और खेती का कम होता मुनाफा।
क्या पड़ रहा है असर?
खेती का क्षेत्र कम होने से स्थानीय स्तर पर सब्जियों और खाद्यान्न उत्पादन में कमी आने लगी है। हरित क्षेत्र सिमटने से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। कृषि आधारित रोजगार के अवसर घट रहे हैं, जबकि जमीन निवेश और रियल एस्टेट का माध्यम बनती जा रही है। इससे भविष्य में स्थानीय खाद्य आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ सकता है।
जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य
शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक भूमि उपयोग परिवर्तन।
कृषि भूमि पर कॉलोनियों, रिसॉर्ट और फार्म हाउस का तेजी से विस्तार।
खेती छोड़ने के पीछे आर्थिक लाभ सबसे बड़ा कारण।
सरकारी स्तर पर वर्षवार समेकित आंकड़ों का अभाव, लेकिन भूमि उपयोग परिवर्तन के रिकॉर्ड बदलाव की पुष्टि करते हैं।
विशेषज्ञ कृषि भूमि संरक्षण के लिए कड़े नियमन और संतुलित शहरी विकास की आवश्यकता बता रहे हैं।
