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गोविंद गुरु की प्रतिमा चोरी होने से आदिवासी समाज में आक्रोश

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गोविंद गुरु की प्रतिमा चोरी होने से आदिवासी समाज में आक्रोश

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तहसीलदार और थानाधिकारी को ज्ञापन सौंपा, प्रतिमा बरामद कर पुनः स्थापित कराने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
निलेश दवे, ओबरी, 12 अगस्त:
ग्राम पंचायत ओबरी के फावटा रोड स्थित आदिवासी श्मशान घाट के सामने स्थापित पूजनीय धर्मगुरु गोविंद गुरु महाराज की प्रतिमा चोरी होने से आदिवासी समाज में आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में आदिवासी भगत एवं समाजजनों ने तहसीलदार और थानाधिकारी को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर प्रतिमा बरामद करने, सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित कराने तथा अज्ञात आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। समाजजनों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
विश्व आदिवासी दिवस पर स्थापित की थी प्रतिमा
समाजजनों ने बताया कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज की ओर से गोविंद गुरु महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई थी। इससे पहले भी यहां प्रतिमा स्थापित थी, लेकिन खंडित होने के बाद नई प्रतिमा स्थापित की गई थी। समाज के लिए यह स्थल धार्मिक और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है।
चबूतरा क्षतिग्रस्त, धर्म ध्वजा भी ले गए
समाजजनों के अनुसार 11 अगस्त की रात अज्ञात असामाजिक तत्व प्रतिमा को चोरी कर ले गए। प्रतिमा स्थल पर बनाए गए चबूतरे को भी क्षतिग्रस्त किया गया तथा वहां लगी धर्म ध्वजा भी चोरी कर ली गई। घटना की जानकारी मिलने पर आदिवासी भगत और समाजजन मौके पर पहुंचे और रोष जताया।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग
इसके बाद समाजजन ओबरी तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। वहीं ओबरी थाने में थानाधिकारी को भी ज्ञापन देकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में चोरी हुई प्रतिमा को बरामद कर सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित कराने और प्रतिमा स्थल को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
आदिवासी समाजजनों ने कहा कि गोविंद गुरु महाराज समाज के पूजनीय धर्मगुरु हैं। प्रतिमा चोरी की घटना से समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। समाजजनों ने चेतावनी दी कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर आसपास के क्षेत्रों से लोगों को एकत्र कर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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