लॉटरी ने खोला मेयर की रेस का रास्ता, अब ‘सामान्य’ चेहरे पर भाजपा-कांग्रेस का दांव
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उदयपुर, 13 अगस्त: नगर निकाय चुनाव में मेयर और चेयरमैन पदों की आरक्षण लॉटरी के बाद उदयपुर की सियासत में दावेदारों की दौड़ तेज हो गई है। उदयपुर नगर निगम का मेयर पद सामान्य (अनारक्षित) होने से अब भाजपा और कांग्रेस दोनों में सामान्य वर्ग के मजबूत पुरुष चेहरे को आगे करने की चर्चा सबसे ज्यादा है। भींडर नगर पालिका और सलूंबर नगर परिषद के चेयरमैन पद भी सामान्य रहने से मेवाड़ में निकाय चुनाव का सियासी तापमान बढ़ गया है।
महिला और ओबीसी दावेदारों की राह मुश्किल
आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही उन नेताओं की रणनीति बदल गई है, जो महिला या ओबीसी कोटे के समीकरण के आधार पर तैयारी कर रहे थे। सामान्य सीट होने से पुरुष दावेदारों को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि अंतिम तस्वीर वार्डवार आरक्षण के बाद ही साफ होगी। पार्टी के बड़े नेता यदि अपने पसंदीदा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाते हैं तो उन्हें दूसरे सुरक्षित वार्ड से मैदान में उतारने की रणनीति भी बन सकती है।
भाजपा में कई बड़े नाम चर्चा में
भाजपा में प्रमोद सामर, पारस सिंघवी, डॉ. रामकृपा शर्मा, तख्तसिंह शक्तावत और अतुल चंडालिया जैसे नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा केके गुप्ता, प्रेम सिंह शक्तावत और नानालाल वया भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। सामान्य महिला दावेदारों में अलका मुंदड़ा, कविता जोशी, पिंकी माड़ावत और किरण तांतेड़ के नाम हैं।
कांग्रेस भी मजबूत चेहरे तलाश रही
कांग्रेस में सामान्य पुरुष वर्ग से फतेह सिंह राठौड़, पंकज शर्मा, दिनेश श्रीमाली और अजय पोरवाल प्रमुख दावेदारों में माने जा रहे हैं। महिला वर्ग में नीलीमा सुखाड़िया, हितांशी शर्मा, सीमा चोर्डिया, नजमा मेवाफरोश और कामिनी गुर्जर सहित कई नाम चर्चा में हैं।
वार्ड आरक्षण के बाद बदलेगा पूरा गणित
फिलहाल आरक्षण लॉटरी ने मेयर पद की संभावित तस्वीर जरूर बदल दी है, लेकिन असल सियासी खेल वार्डवार आरक्षण के बाद शुरू होगा। टिकट वितरण में संगठन के प्रति निष्ठा, चुनावी पकड़, जातीय समीकरण और जीतने की क्षमता सबसे बड़े पैमाने बनेंगे। ऐसे में दोनों दलों के दावेदार अब अपने लिए अनुकूल वार्ड और पार्टी नेतृत्व की पसंद को साधने में जुट गए हैं।
उदयपुर जिला प्रमुख पद भी अनारक्षित
नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों की आरक्षण लॉटरी ने उदयपुर की सियासत में नई संभावनाओं के दरवाजे खोल दिए हैं। उदयपुर जिला प्रमुख पद अनारक्षित ओपन रखा गया है। अब इस पद पर किसी भी वर्ग का महिला या पुरुष उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है। पिछले चुनाव में जिला प्रमुख पद अनारक्षित महिला के लिए था।
17 अगस्त को अगली तस्वीर साफ
अब 17 अगस्त को वार्डवार आरक्षण की लॉटरी होगी। इसके बाद टिकट के दावेदारों का वास्तविक गणित सामने आएगा। सामान्य सीट खुलने से दोनों प्रमुख दलों में बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। खास तौर पर मेयर पद के लिए अब जातीय आरक्षण की बाध्यता नहीं होने से मुकाबला राजनीतिक प्रभाव, संगठनात्मक पकड़ और पार्षदों का समर्थन जुटाने की क्षमता पर केंद्रित होगा।
चित्तौड़गढ़ : सभापति की कुर्सी फिर ओपन, कांग्रेस के सामने बोर्ड बचाने की चुनौती
नगर परिषद चुनाव से पहले आरक्षण लॉटरी ने सभापति पद का सबसे अहम समीकरण साफ कर दिया है। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद का सभापति पद एक बार फिर अनारक्षित ओपन रखा गया है। यानी महिला-पुरुष और किसी भी वर्ग का उम्मीदवार इस पद की दौड़ में शामिल हो सकता है। खास बात यह है कि लगातार तीसरी बार यह पद ओपन हुआ है।
दो चुनाव, दोनों बार पुरुष सभापति
पिछले दो चुनाव में भी सभापति पद अनारक्षित रहा और दोनों बार पुरुष नेता इस कुर्सी तक पहुंचे। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बोर्ड बनाया था और संदीप शर्मा सभापति बने थे। इससे पहले भाजपा का बोर्ड था और सुशील शर्मा सभापति रहे थे।
इस बार असली मुकाबला बोर्ड के बहुमत का
आरक्षण खुला होने से भाजपा और कांग्रेस दोनों को चेहरा चुनने की पूरी आजादी मिलेगी। कांग्रेस के सामने अपना बोर्ड बचाने और भाजपा के सामने सत्ता में वापसी की चुनौती होगी। 60 वार्डों में 97,080 मतदाता प्रत्याशियों का भविष्य तय करेंगे। ऐसे में सभापति पद की दावेदारी सिर्फ व्यक्तिगत जीत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चुनाव के बाद समर्थक पार्षदों का बहुमत जुटाना भी निर्णायक होगा।
राजसमंद : सभापति पद से हटा OBC आरक्षण, अब खुली सभी वर्गों के लिए दावेदारी
नगर निकाय चुनाव की आरक्षण लॉटरी के बाद राजसमंद नगर परिषद में सभापति पद को लेकर सियासी तस्वीर बदल गई है। राजसमंद नगर परिषद का सभापति पद इस बार अनारक्षित ओपन रखा गया है। ऐसे में अब किसी भी वर्ग का महिला या पुरुष नेता चुनाव लड़कर सभापति पद की दावेदारी कर सकता है।
पिछले चुनाव में OBC के लिए था पद
पिछले चुनाव में सभापति पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित था। उस समय कांग्रेस ने नगर परिषद में बोर्ड बनाया और अशोक टांक सभापति चुने गए थे। इस बार आरक्षण बदलने से उन नेताओं के लिए भी रास्ता खुल गया है, जो पिछली बार आरक्षण के कारण दौड़ से बाहर थे।
वार्ड आरक्षण पर टिकी निगाहें
राजसमंद नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। अब राजनीतिक दलों की रणनीति वार्डवार आरक्षण के बाद और स्पष्ट होगी। सामान्य सीट होने से संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है। भाजपा जहां परिषद में अपना प्रभाव मजबूत करने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस अपने पिछले बोर्ड के प्रदर्शन के आधार पर वापसी की रणनीति बनाएगी। अब टिकट चयन में व्यक्तिगत जनाधार और वार्ड में जीत की संभावना सबसे अहम होगी।
डूंगरपुर : सभापति पद ओपन, सागवाड़ा में OBC महिला संभालेगी अध्यक्ष की कुर्सी
नगर निकाय चुनाव की आरक्षण लॉटरी ने डूंगरपुर और सागवाड़ा की सियासत का समीकरण बदल दिया है। डूंगरपुर नगर परिषद का सभापति पद अनारक्षित ओपन रखा गया है। वहीं सागवाड़ा नगर पालिका में इस बार ओबीसी महिला अध्यक्ष बनेगी। आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही दोनों निकायों में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
डूंगरपुर में भाजपा के सामने कब्जा बरकरार रखने की चुनौती
डूंगरपुर नगर परिषद में पिछले सात बोर्ड से भाजपा का कब्जा रहा है। अब ओपन सीट होने से पार्टी के भीतर कई चेहरों की दावेदारी सामने आ सकती है। कांग्रेस भी सत्ता परिवर्तन के लिए मजबूत उम्मीदवार तलाशेगी।
सागवाड़ा में बदला पूरा समीकरण
सागवाड़ा में पिछली बार सीट सामान्य ओपन थी और कांग्रेस का बोर्ड बना था। बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कांग्रेस अध्यक्ष को हटाकर भाजपा समर्थित व्यक्ति को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अब OBC महिला आरक्षण के कारण दोनों दलों को नए सामाजिक समीकरण के अनुरूप प्रत्याशी तलाशना होगा। 17 अगस्त को वार्ड आरक्षण होने के बाद टिकट की दौड़ और तेज होने की उम्मीद है।
बांसवाड़ा : सभापति पद ST ओपन, कुशलगढ़ में OBC और परतापुर-गढ़ी में सीट अनारक्षित
आगामी नगर निकाय चुनावों की आरक्षण लॉटरी के बाद बांसवाड़ा जिले में तीनों निकायों के प्रमुख पदों की तस्वीर साफ हो गई है। बांसवाड़ा नगर परिषद का सभापति पद एसटी ओपन रखा गया है। वहीं कुशलगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष पद ओबीसी ओपन और परतापुर-गढ़ी नगरपालिका अध्यक्ष पद अनारक्षित रहेगा।
पिछली बार सामान्य था सभापति पद
बांसवाड़ा नगर परिषद में पिछली बार सभापति पद सामान्य वर्ग के लिए था और कांग्रेस का बोर्ड बना था। जैनेंद्र त्रिवेदी सभापति रहे थे। इस बार एसटी ओपन होने से राजनीतिक दलों को आदिवासी वर्ग से मजबूत चेहरा तलाशना होगा।
तीनों निकायों में अलग-अलग समीकरण
कुशलगढ़ में OBC ओपन सीट होने से महिला-पुरुष दोनों दावेदारी कर सकते हैं, जबकि परतापुर-गढ़ी में किसी भी वर्ग के प्रत्याशी के लिए रास्ता खुला है। आरक्षण के बाद अब भाजपा और कांग्रेस वार्डवार सामाजिक समीकरण के हिसाब से उम्मीदवारों की तलाश करेंगी। खासकर बांसवाड़ा में एसटी वर्ग के प्रभाव को देखते हुए सभापति पद का चुनाव स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सलूंबर : पहली बार जिला प्रमुख का चुनाव, ST महिला के लिए आरक्षित हुई कुर्सी
नवगठित सलूंबर जिले में पहली बार होने वाले जिला परिषद चुनाव से पहले जिला प्रमुख पद का आरक्षण तय हो गया है। सलूंबर जिला प्रमुख का पद एसटी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण सामने आते ही राजनीतिक दलों में संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
2023 में बना था नया जिला
सलूंबर पहले उदयपुर जिले का हिस्सा था। वर्ष 2023 में नया जिला बनने के बाद यहां स्वतंत्र जिला परिषद और पंचायती राज व्यवस्था बनी। अब पहली बार जिला परिषद के चुनाव होंगे और निर्वाचित सदस्य जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे।
21 वार्डों से चुने जाएंगे सदस्य
सलूंबर जिला परिषद में 6 पंचायत समितियां और 21 जिला परिषद वार्ड हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 5,88,471 है, जिसमें एसटी आबादी 3,86,476 है। ऐसे में एसटी महिला के लिए आरक्षण यहां के सामाजिक समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब भाजपा और कांग्रेस दोनों आदिवासी महिला चेहरों में संगठनात्मक पकड़, क्षेत्रीय प्रभाव और चुनाव जीतने की क्षमता तलाशेंगी। वार्ड आरक्षण के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
प्रतापगढ़ : सभापति पद अनारक्षित महिला, धरियावद में OBC और अरनोद में ST ओपन
नगर निकाय चुनाव की आरक्षण लॉटरी के बाद प्रतापगढ़ जिले में प्रमुख पदों की तस्वीर साफ हो गई है। प्रतापगढ़ नगर परिषद का सभापति पद अनारक्षित महिला के लिए रखा गया है। वहीं धरियावद नगरपालिका अध्यक्ष पद ओबीसी ओपन और अरनोद नगरपालिका अध्यक्ष पद एसटी ओपन रहेगा। इससे दोनों प्रमुख दलों के टिकट समीकरण बदलने तय माने जा रहे हैं।
पिछले आरक्षण से बदली तस्वीर
धरियावद में पिछली बार अध्यक्ष पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था और भाजपा की रामकन्या गुर्जर अध्यक्ष बनी थीं। इस बार OBC ओपन होने से महिला के साथ पुरुष दावेदार भी मैदान में उतर सकेंगे। अरनोद में एसटी ओपन होने से आदिवासी वर्ग के महिला-पुरुष दोनों उम्मीदवारों के लिए रास्ता खुला है।
प्रतापगढ़ में महिला चेहरों की तलाश
प्रतापगढ़ नगर परिषद में 40 वार्ड हैं और पिछले चुनाव में भाजपा ने बोर्ड बनाया था। अब अनारक्षित महिला सीट होने से दोनों दलों में मजबूत महिला चेहरे की तलाश शुरू होगी। आरक्षण व्यवस्था में रोटेशन के कारण इस बार पिछले चुनाव से अलग सामाजिक समीकरण बने हैं। ऐसे में वार्डवार आरक्षण और टिकट वितरण के बाद ही मुकाबले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

