वन विभाग के कामों की होगी थर्ड पार्टी जांच, कलेक्टर ने दिए निर्देश
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बिना टेंडर लाखों के काम और आधे भुगतान के मामले में जांच तेज; कलेक्टर देशलदान के निर्देश पर जिला परिषद ने बनाई जांच टीम, 7 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
जुगल कलाल
डूंगरपुर, 19 अगस्त: जिले में वन विभाग की ओर से बिना टेंडर लाखों रुपए के काम करवाने और भुगतान उठाने के मामले में अब जांच का दायरा बढ़ गया है। पंजाब केसरी ने आसपुर रेंज में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत बिना टेंडर कराए गए कार्यों और करीब 50 प्रतिशत भुगतान के मामले को प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए थे। अब कलेक्टर देशलदान के निर्देश पर इन कार्यों की थर्ड पार्टी जांच करवाई जाएगी। कलेक्टर के निर्देश पर जिला परिषद सीईओ हनुमान सिंह राठौड़ ने जांच टीम गठित कर दी है। टीम को सात दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। खास बात यह है कि जांच के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों के बजाय दूसरे विभागों के एक्सईएन और एईएन स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
वन विभाग ही नहीं, दूसरे विभागों के काम भी जांच के दायरे में
कलेक्टर देशलदान ने केवल वन विभाग के कार्यों की ही जांच के निर्देश नहीं दिए हैं। जलग्रहण विभाग, पंचायती राज विभाग और भूजल विभाग की ओर से करवाए गए कार्यों की भी थर्ड पार्टी जांच होगी। इसके लिए दूसरे विभागों के तकनीकी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच अधिकारी मौके पर जाकर कार्यों का भौतिक सत्यापन करेंगे। मौके पर हुए निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की मात्रा, स्वीकृत राशि, नियमों के अनुसार कार्य हुआ या नहीं और मौके पर वास्तविक स्थिति क्या है, इसका मिलान किया जाएगा। निर्देशों के अनुसार कार्यों की शत-प्रतिशत जांच की जानी है।
आसपुर रेंज में 50 लाख के काम पर उठे थे सवाल
दरअसल, आसपुर रेंज में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत करीब 50 लाख रुपए के कच्चे चेकडैम समेत अन्य कार्य बिना टेंडर करवाए जाने का मामला सामने आया था। इतना ही नहीं, इन कार्यों का करीब 50 प्रतिशत भुगतान भी किए जाने की बात सामने आई थी। मामले में रेंजर से लेकर वन विभाग के उच्च अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। इसी तरह डूंगरपुर रेंज में भी लाखों रुपए के कार्य करवाए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद वन विभाग की ओर से जयपुर स्तर से भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
पहली बार एक साथ इतने कार्यों की जांच
आमतौर पर किसी शिकायत के बाद जांच टीम गठित कर दी जाती है, लेकिन इस बार जिला कलेक्टर ने स्वयं पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न विभागों के कार्यों की थर्ड पार्टी जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में अलग-अलग विभागों के अधिकारी शामिल होने से निष्पक्षता की उम्मीद बढ़ी है। अब असली तस्वीर सात दिन बाद सामने आएगी, जब जांच टीम अपनी रिपोर्ट जिला परिषद सीईओ को सौंपेगी। रिपोर्ट में यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।

