कम बारिश से चित्तौड़गढ़ दुर्ग के सीताफल में बढ़ी मिठास
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ठेका 1.28 लाख रुपए महंगा छूटा, प्राकृतिक गुणवत्ता से बाजार में बढ़ा भरोसा; इस बार अच्छी फसल की उम्मीद
चित्तौड़गढ़, 28 सितंबर: चित्तौड़गढ़ दुर्ग में प्राकृतिक रूप से उगने वाले सीताफल इस बार कम बारिश के कारण बेहतर गुणवत्ता और अधिक मिठास की उम्मीद जगा रहे हैं। पेड़ों पर अच्छी संख्या में फल दिखाई दे रहे हैं। इसका असर ठेके की बोली पर भी नजर आया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के क्षेत्र में लगे सीताफल के पेड़ों का ठेका इस बार 3.61 लाख रुपए में छूटा, जबकि पिछले साल यह 2.33 लाख रुपए में हुआ था। यानी ठेका राशि में 1.28 लाख रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
उद्यान सहायक प्रथम राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि करीब 14 किलोमीटर क्षेत्र में फैले दुर्ग में बड़ी संख्या में सीताफल के पेड़ प्राकृतिक रूप से उगे हैं। इन्हें लगाया नहीं गया, बल्कि समय के साथ ये स्वत: विकसित हुए हैं। दुर्ग के अंदर बाड़ों में लगे पेड़ों के फलों की नीलामी हर साल एएसआई की ओर से की जाती है। जुलाई-अगस्त से फल आने शुरू होते हैं और दीपावली के आसपास इनकी बिक्री शुरू होती है।
इस बार 2.75 लाख रुपए की आरक्षित बोली रखी गई थी और अंतिम बोली 3.61 लाख रुपए तक पहुंची। प्रस्ताव स्वीकृति के लिए जोधपुर सर्किल भेजा गया है। स्वीकृति के बाद दुर्ग निवासी मनीष शर्मा को ठेका मिलेगा।
वर्मा के अनुसार ज्यादा बारिश होने पर सीताफल की कलियां और फल प्रभावित होते हैं। कई बार कच्चे फल गिर जाते हैं और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इस बार कम बारिश के चलते बीमारी कम रहने और फल का आकार व गुणवत्ता बेहतर रहने की संभावना है। सीताफल की मांग स्थानीय बाजार के साथ अन्य क्षेत्रों में भी रहती है।
तहसील क्षेत्र के पेड़ों की नीलामी बाद में
दुर्ग के बाहर सड़क किनारे और अन्य क्षेत्रों में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सीताफल के पेड़ों की नीलामी तहसील कार्यालय की ओर से की जाएगी। तहसीलदार बनवीर सिंह राठौड़ ने बताया कि निकाय और पंचायती चुनाव की प्रक्रिया के कारण नीलामी नहीं हो सकी। चुनावी काम पूरा होने के बाद नई तारीख घोषित कर नीलामी कराई जाएगी।

