पूर्व कुलपति सारंगदेवोत की बढ़ेगी मुश्किल, उनके कार्यकाल की जांच कराएगा विद्यापीठ
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नियुक्तियों, पदोन्नतियों और लेखा विभाग की अनियमितताओं को लेकर ऑडिट-रिव्यू कमेटी गठित, नियम विरुद्ध दिए एडवांस की होगी वसूली
उदयपुर, 29 सितंबर: राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति के कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों, पदोन्नतियों और लेखा विभाग से जुड़ी कथित अनियमितताओं की अब वर्ष 2012 से 2026 तक विस्तृत जांच होगी। मंगलवार को प्रतापनगर स्थित कुलपति सचिवालय सभागार में कुलपति प्रो. मंजु मांडोत की अध्यक्षता में हुई एग्जीक्यूटिव कौंसिल (बॉम) की बैठक में इस संबंध में ऑडिट एवं रिव्यू कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया। कमेटी पूरे मामले की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट एग्जीक्यूटिव कौंसिल के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
बैठक में पूर्व कुलपति के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों को नियमों के विपरीत एडवांस राशि दिए जाने का मामला भी सामने आया। परिषद ने ऐसे मामलों की जांच के साथ संबंधित लोगों से राशि की वसूली की कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
बैठक की शुरुआत में कुलाधिपति कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर और कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने एग्जीक्यूटिव कौंसिल के नवनियुक्त सदस्यों वल्लभनगर विधायक उदय लाल डांगी, पूर्व कुल प्रमुख प्रफुल्ल नागर और पूर्व कुलपति प्रो. लोकेश भट्ट का माला व उपरणा पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान 29 अप्रैल 2026 को हुई कार्यकारी परिषद और 25 जुलाई 2026 को हुई अकादमिक परिषद की बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई।
अजमेर की जमीन की स्थिति की भी होगी समीक्षा
कुलपति प्रो. मांडोत ने बताया कि एमओए एवं रूल्स 2023 के अनुसार नवीन कार्यकारी परिषद, अकादमिक परिषद और वित्त समिति के गठन को बैठक में अनुमोदन के लिए रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। वहीं अजमेर स्थित राजस्थान विद्यापीठ की जमीन को लेकर भी कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया। यह कमेटी जमीन की वर्तमान स्थिति की जांच कर अगली बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। पूर्व कुल प्रमुख प्रफुल्ल नागर ने कहा कि विद्यापीठ कुल ने किसी संपत्ति का विक्रय या लीज नहीं की है, बल्कि सरकार के माध्यम से विधि सम्मत रूप से ट्रस्ट का प्रबंधन हस्तांतरित हुआ है। बैठक में यूजीसी सदस्य प्रो. आनंद पालीवाल, रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

