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रेंजर प्रताप सिंह को मिले शहीद का दर्जा, परिजनों का झलका दर्द

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रेंजर प्रताप सिंह को मिले शहीद का दर्जा, परिजनों का झलका दर्द

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पत्नी बोली- आरोपियों को फांसी या एनकाउंटर हो, बहादुरी के लिए सम्मान को भेजा गया था नाम;
प्रतापगढ़, 4 अक्टूबर :
अवैध खनन रोकने गए वन विभाग के रेंजर प्रताप सिंह चुण्डावत की 21 सितंबर की रात डंपर से कुचलकर हत्या कर दी गई। घटना मोहनपुरा तलाई क्षेत्र में वनभूमि पर अवैध खनन की कार्रवाई के दौरान हुई। परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ प्रताप सिंह को शहीद का दर्जा देने की मांग की है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से रिपोर्ट तलब की है।
चित्तौड़गढ़ जिले के मेडी का अमराना निवासी प्रताप सिंह ने वर्ष 2011 में वन विभाग में गार्ड के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में वनपाल बने और करीब तीन वर्ष पहले रेंजर पद पर पदोन्नत हुए। परिजनों के अनुसार अवैध खनन और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ उनकी कार्रवाई के कारण विभाग में उनकी अलग पहचान थी। इसी वर्ष उनका नाम राज्य स्तर पर सम्मान के लिए भी भेजा गया था।
डंपर के आगे बाइक लगाई, कुचलकर 50 मीटर घसीटा
परिजनों के अनुसार मुखबिर से सूचना मिलने पर प्रताप सिंह एक फॉरेस्ट गार्ड के साथ मोहनपुरा तलाई पहुंचे। वहां वनभूमि में जेसीबी से मिट्टी खोदी जा रही थी और ट्रैक्टर व डंपर खड़े थे। कार्रवाई के दौरान एक डंपर चालक वाहन लेकर भागने लगा। प्रताप सिंह ने पीछा कर बाइक डंपर के आगे लगा दी। आरोप है कि इसी दौरान मौके पर पहुंचे लोगों ने प्रताप सिंह के साथ मारपीट की और डंपर चालक को उन्हें कुचलने के लिए कहा। डंपर ने बाइक सहित प्रताप सिंह को कुचल दिया और करीब 50 मीटर तक घसीटता ले गया। बाद में डंपर चालक रास्ते में मिट्टी खाली कर मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना परिवार को रात करीब 12 बजे मिली। परिजन निम्बाहेड़ा अस्पताल पहुंचे, जहां प्रताप सिंह की मौत की जानकारी हुई।
तीन विधवा महिलाएं, दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
प्रताप सिंह के चचेरे भाई शैतान सिंह चुण्डावत ने बताया कि प्रताप सिंह जब तीन माह के थे, तभी हादसे में उनके पिता की मौत हो गई थी। दादा ने उनका पालन-पोषण किया। बाद में दादा का भी निधन हो गया। परिवार में वही कमाने वाले थे। अब घर में दादी, मां और पत्नी तीन विधवा महिलाएं हैं। 8 वर्षीय बेटा और 11 वर्षीय बेटी भी हैं। परिवार के पास करीब एक बीघा जमीन है। पत्नी आशा कंवर ने बताया कि घटना वाले दिन शाम तक प्रताप सिंह कार्यालय में काम कर रहे थे। शाम सवा पांच बजे उन्हें बस में बैठाकर पीहर भेजा था। रात साढ़े नौ बजे बेटी से फोन पर बात हुई। इसके बाद रात करीब 12:50 बजे फोन आया कि प्रताप सिंह का एक्सीडेंट हो गया है। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि उन्हें डंपर से कुचल दिया गया है। आशा कंवर ने आरोपियों के लिए फांसी या एनकाउंटर की मांग करते हुए कहा कि ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाने वाले उनके पति को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। परिवार के अनुसार वन मंत्री संजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सहायता का आश्वासन दिया है।

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