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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का कठोर कारावास

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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का कठोर कारावास

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पॉक्सो कोर्ट-2 का फैसला, 50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया; पीड़िता को 2 लाख रुपए प्रतिकर देने की अनुशंसा
उदयपुर, 8 अक्टूबर:
उदयपुर की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत संख्या-2 ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त शैलेष कुमार को दोषी मानते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश अमित सहलोत ने अभियुक्त पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा नहीं कराने पर एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियोजन की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक महेन्द्र ओझा ने पैरवी की।
प्रकरण के अनुसार 17 जुलाई 2025 को 14 वर्षीय नाबालिग घर से बिना बताए चली गई थी। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। इसके बाद पिता ने पानरवा थाने में गुमशुदगी और अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अनुसंधान के बाद शैलेष कुमार पुत्र बसंतीलाल डामोर निवासी मोडीवासा, थाना खेरवाड़ा के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 के तहत दोषी माना। धारा 137(2) में भी अदालत ने 5 साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं धारा 127(4) के आरोप से अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया गया।
अदालत ने राजस्थान राज्य पीड़ित प्रतिकर योजना-2023 के तहत पीड़िता को 2 लाख रुपए प्रतिकर दिलाने की अनुशंसा भी की है। अदालत ने पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने के निर्देश दिए हैं।

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