बड़ी झील के इको टोन पार्क में कैफेटेरिया का विरोध, ‘इको सेक्रेड’ घोषित करने की मांग
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झील संवाद में उठी आवाज—महाशीर संरक्षण रिजर्व के अपस्ट्रीम और प्रभाव क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे रोक
उदयपुर, 18 अक्टूबर: बड़ी झील के इको टोन पार्क में प्रस्तावित कैफेटेरिया को लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने आपत्ति जताई है। रविवार को बारी घाट पर आयोजित झील संवाद में वक्ताओं ने कहा कि कैफेटेरिया जैसी व्यावसायिक गतिविधियों से झील की पारिस्थितिकी, महाशीर मछली के प्राकृतिक आवास और जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बड़ी झील को ‘इको सेक्रेड’ यानी पर्यावरणीय पवित्र झील घोषित करने और इसके अपस्ट्रीम व प्रभाव क्षेत्र में नई व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की। संवाद से पहले स्वच्छता श्रमदान भी किया गया।
झील विशेषज्ञ एवं महाशीर संरक्षण रिजर्व मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि बड़ी झील केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि उदयपुर की जल सुरक्षा और जैव विविधता से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय के 4 अप्रैल 2017 के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाशीर संरक्षण रिजर्व के प्राकृतिक आवास, जल प्रवाह, प्रजनन स्थलों और जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा जरूरी है। किसी भी नई गतिविधि से पहले उसके पर्यावरणीय प्रभाव और संरक्षण संबंधी प्रावधानों की समीक्षा होनी चाहिए।
कचरे और प्रदूषण का बढ़ सकता है खतरा
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि कैफेटेरिया से खाद्य अपशिष्ट, प्लास्टिक, गंदे पानी, शोर और कृत्रिम प्रकाश की समस्या बढ़ सकती है। वर्षा के साथ प्रदूषक झील तक पहुंचने से जल गुणवत्ता और जलीय जीव प्रभावित होने की आशंका है। सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि बड़ी झील को केवल पर्यटन और मनोरंजन के नजरिये से नहीं देखना चाहिए। शिक्षाविद कुशल रावल ने प्रस्तावित कैफेटेरिया पर पुनर्विचार तथा झील के प्रभाव क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार पर रोक लगाने की मांग की। वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह और झील प्रेमी विनोद कुमावत ने कहा कि झील की प्राकृतिक शांति, महाशीर के आवास और जैव विविधता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि नई गतिविधियों से संरक्षण प्रयास और न्यायालयीन निर्देशों के उद्देश्य प्रभावित नहीं हों।

