रसायनों के इस्तेमाल से घटाया जा सकता है पिछोला-फतहसागर से वाष्पीकरण
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सेटिल और स्टीरियल अल्कोहल के प्रयोग से पानी की बचत की संभावना, झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य ने कलेक्टर को भेजा सुझाव
उदयपुर, 22 अक्टूबर: कमजोर मानसून के बाद पिछोला और फतहसागर झीलों में उपलब्ध जल की बचत को लेकर नए उपायों पर विचार करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी क्रम में झीलों की सतह से वाष्पीकरण कम करने के लिए विशेष रसायनों के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है। झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कलेक्टर को ज्ञापन भेजकर सेटिल अल्कोहल और स्टीरियल अल्कोहल के प्रयोग की संभावना पर विचार करने का आग्रह किया है।
उन्होंने दावा किया गया है कि ये रसायन पानी की सतह पर बेहद पतली परत बनाकर वाष्पीकरण कम कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में इस तकनीक से 30 से 50 प्रतिशत तक वाष्पीकरण घटने की संभावना बताई जाती है। हालांकि, पिछोला और फतहसागर जैसी बड़ी झीलों में इसके वास्तविक परिणाम स्थानीय मौसम, हवा की गति और जलाशय की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। इसलिए इस संभावित बचत को सुनिश्चित परिणाम मानने के बजाय वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर परखना जरूरी होगा।
जलीय जीवन और पेयजल गुणवत्ता की जांच जरूरी
प्रस्ताव के अनुसार सतह पर बनने वाली पतली परत के बावजूद ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान जारी रह सकता है। हालांकि, झीलों में इन रसायनों के इस्तेमाल से पहले जलीय जीवों, पानी की गुणवत्ता और पेयजल के रूप में इसकी उपयुक्तता पर विशेषज्ञों से आकलन कराना आवश्यक होगा। बड़े जलाशयों में हवा और लहरों के कारण ऐसी परत की प्रभावशीलता भी अलग-अलग हो सकती है।
पहले भी प्रयोग का किया उल्लेख
पालीवाल ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि पिछोला झील में पहले भी वाष्पीकरण कम करने के लिए रासायनिक उपाय अपनाए जा चुके हैं। उन्होंने कलेक्टर, जो झील विकास समिति के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं, से इस विकल्प की व्यवहारिकता की जांच कर उचित कदम उठाने की मांग की है।

